नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 संक्रमण फैलने से रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केन्द्र से जवाब मांगा है. न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. Also Read - Corona Cases in UP: उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण से और 312 मरीजों की मौत, 15,747 नये मामले

लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने संबंधी गृह मंत्रालय की अधिसूचना को नागरीका एक्सपोर्ट्स और फिक्स पैक्स प्रा लि सहित तीन निजी कंपनियों ने चुनौती दी है. Also Read - Viral Video:'लव यू जिंदगी' सुनते-सुनते कोरोना से हार गई ये युवा मां, हजारों दुआओं...

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘सॉलिसीटर जनरल (तुषार मेहता) इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं. दो सप्ताह बाद इसे सूचीबद्ध किया जाये.’’ शीर्ष अदालत ने इन निजी फर्मों से कहा कि वे अपने आवेदनों की प्रति ई मेल के माध्यम से सॉलिसीटर जनरल को उपलब्ध करायें. Also Read - Kerala Lockdown Extension News: केरल में फिर बढ़ा लॉकडाउन, अब 23 मई तक तालाबंदी

टेक्सटाइल फर्म नागरीका एक्सपोर्ट्स लि. ने फैक्टरियों के चालू नहीं होने के बावजूद अपने स्टाफ, ठेका मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया है. इस फर्म ने अपनी याचिका में कहा है कि लॉकडाउन की वजह से फैक्टरियों में काम बंद होने की वजह से उसे अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है.

याचिका में कहा गया है कि इसके अलावा सरकार ने 29 और 31 मार्च के आदेशों में सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है, जो करीब पौने दो करोड़ रुपए है. याचिका में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के बारे में केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है. इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस मामले का निबटारा होने तक उसे अपने कामगारों को 50 प्रतिशत वेतन का भुगतान करने की अनुमति भी मांगी है.