नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 संक्रमण फैलने से रोकने के लिये लागू लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर केन्द्र से जवाब मांगा है. न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान केन्द्र को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. Also Read - बिहार में Coronavirus के 133 नए मामले, बढ़कर कुल 2870 हुए, पढ़े जिलेवार डिटेल

लॉकडाउन के दौरान अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने संबंधी गृह मंत्रालय की अधिसूचना को नागरीका एक्सपोर्ट्स और फिक्स पैक्स प्रा लि सहित तीन निजी कंपनियों ने चुनौती दी है. Also Read - ब्रिटेन में पीएम के मुख्‍य सलाहकार ने किया था लॉकडाउन का उल्लंघन, उप मंत्री ने दिया इस्तीफा

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘सॉलिसीटर जनरल (तुषार मेहता) इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं. दो सप्ताह बाद इसे सूचीबद्ध किया जाये.’’ शीर्ष अदालत ने इन निजी फर्मों से कहा कि वे अपने आवेदनों की प्रति ई मेल के माध्यम से सॉलिसीटर जनरल को उपलब्ध करायें. Also Read - प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, 28 मई को सुनवाई

टेक्सटाइल फर्म नागरीका एक्सपोर्ट्स लि. ने फैक्टरियों के चालू नहीं होने के बावजूद अपने स्टाफ, ठेका मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया है. इस फर्म ने अपनी याचिका में कहा है कि लॉकडाउन की वजह से फैक्टरियों में काम बंद होने की वजह से उसे अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है.

याचिका में कहा गया है कि इसके अलावा सरकार ने 29 और 31 मार्च के आदेशों में सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है, जो करीब पौने दो करोड़ रुपए है. याचिका में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के बारे में केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है. इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस मामले का निबटारा होने तक उसे अपने कामगारों को 50 प्रतिशत वेतन का भुगतान करने की अनुमति भी मांगी है.