नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के न्यायालय के फैसले की आलोचना करने वाले ट्वीट के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण से अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और केंद्र की अवमानना याचिकाओं पर बुधवार को जवाब मांगा. कोर्ट ने भूषण को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है. न्यायालय ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 7 मार्च की तारीख तय की है.

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मामले पर विस्तृत सुनवाई करने की जरूरत
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि वह इस सवाल पर विचार करेगी कि क्या कोई वकील या या अन्य व्यक्ति विचाराधीन मामलों को लेकर अदालत की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र है, जिससे कि जनमत प्रभावित हो सकता है. पीठ ने कहा कि अदालत की आलोचना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप भी हो सकता है. पीठ ने कहा, इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करने की जरूरत है, नोटिस जारी किया जाता है.  मामले की सनुवाई आगामी  को होगी.

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भूषण के ट्वीट पर केंद्र ने अवमानना कार्यवाही शुरू करने की मांग की
केंद्र सरकार ने 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट रुख कर कुछ विवादित ट्वीट के लिए वकील प्रशांत भूषण पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी. दरअसल, भूषण ने पिछले दिनों कुछ ट्वीट किए थे जिसके बारे में केंद्र की दलील है कि वे एम नागेश्वर राव की सीबीआई के अंतरिम निदेशक के तौर पर नियुक्ति से जुड़े लंबित मामले में गलत बयान देने जैसे हैं. कुछ दिनों पहले अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने भी ट्वीटों के लिए भूषण के खिलाफ ऐसी ही अवमानना की याचिका दाखिल की थी.

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राव को अंतरिम निदेशक नियुक्त किए जाने को चुनौती
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा था कि एनजीओ कॉमन कॉज की उस याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें राव को जांच एजेंसी का अंतरिम निदेशक नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है. भूषण ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया था कि वेणुगोपाल ने केंद्र की तरफ से पेश होकर राव की नियुक्ति के मुद्दे पर शीर्ष अदालत को गुमराह किया था.