नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को आपसी सहमति से स्थापित समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुना सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कहा गया है कि अगर सहमति से समलैंगिक संबंध बनाए गए हैं तो उसे अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाए. Also Read - सात महीने की हिरासत के बाद रिहा होंगे उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जारी किए आदेश

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में एक संवैधानिक बेंच पिछले 10 जुलाई से इस मामले में सुनवाई शुरू की थी. इसके बाद 17 जुलाई को मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया गया था. Also Read - Coronavirus: सुप्रीम कोर्ट भी लॉकडाउन, वकीलों के चैम्बर हुए बंद, जरूरी मामलों की ही होगी सुनवाई

जुलाई महीने में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई कानून मौलिक अधिकारों के खिलाफ है तो बहुमत की सरकार के इसे रद्द करने के फैसले तक इंतजार नहीं किया जा सकता है. संवैधानिक बेंच ने कहा था कि वह धारा-377 को पूरी तरह खारिज नहीं करने जा रहे. वह सिर्फ उस प्रावधान को देख रहे हैं, जिसमें दो बालिगों के समलैंगिक संबंध को अपराध माना जाएगा या नहीं. Also Read - कोरोना इफेक्ट: तिहाड़ से कैदियों की रिहाई संभव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार!

दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट में कहा था कि एलजीबीटीक्यू (लेस्बियन, गे, बाय सेक्सुअल, ट्रांसजेंडर्स, क्वीर) के मौलिक अधिकार प्रोटेक्ट होने चाहिए. किसी से भी जीवन और स्वच्छंदता का अधिकार नहीं लिया जा सकता.