नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चार साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या के दोषी 22 साल के एक शख्स की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने सोमवार को मामले के मूल दस्तावेज मांगे और निर्देश दिया कि अपीलार्थी को सुनाई गई मौत की सजा के अमल पर रोक लगाई जाए. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने PM मोदी के वाराणसी से निर्वाचन के खिलाफ दायर तेज बहादुर की याचिका पर सुनाया यह फैसला

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शहडोल के विनोद को सुनाई थी सजा Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इन 4 राज्यों से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, कहा- 'दिसंबर में और बदतर हो सकते हैं हालात'

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर मंगलवार को अपलोड किया गया. दोषी करार दिए गए मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के निवासी विनोद उर्फ राहुल चौहट्टा ने नाबालिग से बलात्कार और हत्या के मामले में फांसी की सजा को बरकरार रखने के हाई कोर्ट के आठ अगस्त के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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मौत की सजा बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने देखा कि इस तरह के अपराध करने वाले अपराधियों को मानवता के नाम पर सजा से राहत देने को लेकर राज्य का रुख नरम नहीं था.

हाई कोर्ट ने दी थी फांसी की सजा

हाई कोर्ट की खंड पीठ ने अपने आदेश में कहा था, ऐसे अपराधियों के हाथों में मानवता को अधिक खतरा है. हमने देखा कि अपीलार्थी (विनोद) के पक्ष में अपराध की गंभीरता को कम करने वाली कोई परिस्थिति नहीं है.

शहडोल जिले की विशेष पॉक्सो अदालत ने 28 फरवरी को विनोद को मौत की सजा सुनाई थी. उसने 13 मई 2017 को बच्ची को बिस्कुट का लालच देकर उससे बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी. बच्ची की लाश झाड़ियों में मिली थी.