एक अप्रैल से नेशनल और स्टेट हाईवे के पास शराब की दुकानें नहीं होंगी। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक हाइवे से 500 मीटर की दूरी तक शराब नहीं बिक सकेगी। लेकिन 20,000 से कम आबादी वाले इलाके और हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और मेघालय जैसे राज्यों के लिए पाबंदी का दायरा 220 मीटर तक ही रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों की अर्जियों पर शुक्रवार को अहम आदेश पारित कर 15 दिसंबर 2016 के अपने आदेश में संशोधन किया। चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि हाईवे के पास शराब की दुकानों पर पाबंदी लगाने वाला फैसला बार, पब और रेस्तरां पर भी लागू होगा, क्योंकि शराब पीकर गाड़ी चलाने से जानलेवा रोड एक्सीडेंट्स होते हैं।

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल एन राव की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण होने वाले सड़क हादसों के मद्देनजर यह आदेश दिया गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि 15 दिसंबर के फैसले से पहले जिन शराब विक्रेताओं को लाइसेंस दिए गए, वे इस साल 30 सितंबर तक मान्य होंगे।

15 दिसंबर के फैसले के मुताबिक दूसरे शराब की दुकानें एक अप्रैल से बंद करनी होंगी। हाईवे के पास शराब की दुकानों की अनुमति देने के लिए 220 मीटर का पैमाना सिक्किम, मेघालय और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में भी लागू होगा। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि फैसले में सुधार की जरूरत है, क्योंकि इससे राज्यों का बजट गड़बड़ा जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पास इस मामले को लेकर कई अर्जियां आई थी, जिसमें 15 दिसंबर के फैसले पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई गई थी।

बहरहाल, कोर्ट ने तमिलनाडु को 500 मीटर वाले नियम से कोई छूट नहीं दी है। तमिलनाडु की पैरवी अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने की थी। बेंच ने कहा कि कोर्ट का यह निर्देश देश के बाकी हिस्से पर लागू होगा कि 31 मार्च के बाद हाईवे पर शराब की दुकानों के लिए कोई लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे।