नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी 24 उच्च न्यायालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे जिला अदालतों में न्यायिक रिक्तियां भरे जाने तथा न्यायिक अधिकारियों के लिए अवसंरचना पर एक अगस्त से हुई अबतक की प्रगति पर एक ताजा रपट सौंपे. पिछले साल अक्टूबर में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने जिला अदालतों में 5,000 से अधिक रिक्तियों के अलावा न्यायाधीशों, याचियों और वकीलों के लिए इन अदालत परिसरों में अपर्याप्त अवसंरचना को संज्ञान में लिया था.

अदालत ने वरिष्ठ वकीलों श्याम दीवान, के.वी. विश्वनाथन, विजय हंसारिया और गौरव अग्रवाल को न्यायमित्र नियुक्त किया था और रिक्तियों व अवसंरचना से जुड़े मुद्दों पर घटनाक्रम की निगरानी करने में मदद करने के लिए कहा था. न्यायालय ने संबंधित स्टेकहोल्डर्स के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए थे और इन मुद्दों पर समयसीमा तय की थी. पहली अगस्त को अदालत ने इन मुद्दों को सुलझाने में हुई प्रगति के बारे में जानकारी देने के लिए एक निर्देश पारित किए थे.