नई दिल्लीः एयरसेल मैक्सिस, आईएनएक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पू्र्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेश जाने की सशर्त अनुमति दे दी है. शीर्ष अदालत ने कहा है वह शर्त के तौर पर रजिस्ट्री में 10 करोड़ रुपए जमा कराने के बाद विदेश जा सकते हैं. इससे पहले 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया था. उन्होंने शीर्ष अदालत से विदेश जाने की अनुमति मांगी थी. Also Read - हाथरस कांड पर SC का फैसला-अभी केस ट्रायल यूपी में ही होगा, तुरंत ट्रांसफर की जरूरत नहीं

चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि हमें इसमें रुचि नहीं है. हमारे पास इससे जरूरी कई काम हैं. हम देखेंगे कि हम इसमें क्या कर सकते हैं. इससे पहले नवंबर में भी कार्ति ने विदेश जाने की अनुमति के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था. उस वक्त भी चीफ जस्टिस ने कहा था कि आप भारत में ही रहिए. Also Read - Loan Moratorium Cashback: Lockdown के दौरान EMI चुकाने वालों को 5 नवंबर तक मिल जाएगा कैशबैक! जानें किन-किन लोगों को होगा फायदा

शीर्ष अदालत ने कार्ति से पूछताछ के लिए पांच, छह, सात और 12 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया और कहा कि वह ‘कानून के साथ खिलवाड़ नहीं करें.’ प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा, ‘आपको 10 से 26 फरवरी के बीच जहां जाना हो वहां जाएं लेकिन पूछताछ में सहयोग जरूर करें.’ पीठ ने कहा, ‘कृपया अपने मुवक्किल से कहें कि उन्हें सहयोग करना होगा. आपने सहयोग नहीं किया है. हम कई चीजें कहना चाहते हैं. हम उन्हें अभी नहीं कह रहे हैं.’ पीठ ने कार्ति से 10 करोड़ रुपए जमा कराने के अलावा लिखित में यह देने को कहा है कि वह वापस आएंगे और जांच में सहयोग करेंगे. Also Read - Hathras Case: हाथरस मामले पर अब होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनाएगा फैसला

कार्ति ने 10 से 26 फरवरी और फिर 23 से 31 मार्च के बीच विदेश जाने की अनुमति मांगी थी. पीठ कार्ति की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने ‘टोटस टेनिस लिमिटेड’ कंपनी द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय टेनिस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन की यात्रा करने की अनुमति मांगी थी. ‘टोटस टेनिस लिमिटेड’ का कार्यालय ब्रिटेन में पंजीकृत है.

इससे पहले सोमवार को एयरसेल-मैक्सिस मामले में दिल्ली की एक अदालत ने पी. चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम छूट की अवधि 18 फरवरी तक बढ़ा दी थी. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने चिदंबरम को इस आधार पर राहत दी कि वह एक फरवरी को उपलब्ध नहीं रहेंगे. मामले की सुनवाई पहले एक फरवरी को होनी थी.

इससे पहले 11 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में सीबीआई ने अदालत को बताया था कि एयरसेल-मैक्सिस मामले में केंद्र ने उसे सेवारत और पूर्व नौकरशाहों समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है. इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति भी आरोपी हैं.

विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के जिन तत्कालीन सदस्यों के खिलाफ म‍ंजूरी हासिल की गई है उनमें तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव अशोक झा, वित्त मंत्रालय में तत्कालीन अतिरिक्त सचिव अशोक चावला और तत्कालीन संयुक्त सचिव कुमार संजय कृष्ण शामिल हैं. इसके अलावा मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक दीपक कुमार सिंह और तत्कालीन अवर सचिव राम शरण शामिल हैं. एजेंसी ने पिछले साल 16 नवंबर को कहा था कि पी चिदंबरम के लिए ऐसी ही मंजूरी हासिल की जा चुकी है. मामले में 18 आरोपी हैं.

इस मामले में सीबीआई द्वारा 19 जुलाई, 2018 को दायर आरोप-पत्र में चिदंबरम और उनके बेटे का नाम था. एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश के समक्ष एक पूरक आरोप-पत्र दायर किया था, जिन्होंने इस पर विचार के लिए 31 जुलाई, 2018 की तारीख तय की थी. यह मामला एयरसेल मैक्सिस सौदे में विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में कथित अनियमितता से जुड़ा है.