नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बहुचर्चित कठुआ गैंगरेप और मर्डर के मामले की सुनवाई पंजाब की पठानकोट कोर्ट को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है. न्यायालय ने कठुआ मामले में किसी देरी से बचने के लिए दैनिक आधार पर फास्ट ट्रैक सुनवाई करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार की जांच एजेंसी पर भरोसा जताते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने से इनकार कर दिया. पीड़िता के परिवार ने सीबीआई जांच का विरोध किया था.Also Read - Delhi Pollution: दिल्ली में प्रदूषण के बीच खुले स्कूल, सुप्रीम कोर्ट ने AAP सरकार से किया सवाल

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मामले की पूरी सुनवाई की प्रक्रिया कैमरा के सामने होगी. अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी. सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार को पठानकोट कोर्ट में सरकारी अभियोजक की नियुक्ति करने की अनुमति दी और सरकार से पीड़ित के परिवार, उनके वकील और गवाहों को सुरक्षा देने के लिए कहा. Also Read - दिल्ली के कंस्ट्रक्शन मजदूरों को 5000 रुपये देगी केजरीवाल सरकार, जानें पूरी डिटेल

बता दें कि मामले की सुनवाई चंडीगढ़ स्थानांतरित करने को लेकर दायर पीड़िता के पिता की अर्जी और मामले की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपने के आग्रह को लेकर दायर आरोपियों की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई करते हुए ये निर्णय दिया है. कोर्ट ने कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में सुनवाई पर लगाई गई रोक हटाई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला उसके पास है. कोई और अदालत इस संदर्भ में आदेश पारित नहीं करेगी. मामले में पीड़ित के परिजनों और उसके मामले की पैरवी कर रही वकील की सुरक्षा बरकरार रहेगी.

इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने को ट्रांसफर करने विरोध यह कहते हुए किया था उसके पास एक अलग दंड संहिता है और मुकदमे के स्थानांतरण से गवाहों को असुविधा होगी. इस बीच केंद्र ने बीते शुक्रवार को शीर्ष कोर्ट से कहा कि इसमें जैसी भी किसी सहायता की जरूरत होगी, वह की जाएगी. केंद्र सरकार मामले की जांच जम्मू एवं कश्मीर पुलिस से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने की मांग से जुड़ी एक याचिका में जवाबदेह है. इस याचिका का दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने विरोध किया है.

इस साल के शुरुआत में 10 जनवरी को आठ साल की लड़की जम्मू के कठुआ के एक गांव में अपने घर के पास से लापता हो गई थी. लापता होने के एक सप्ताह बाद किशोरी का शव 17 जनवरी को एक जंगल से बरामद किया गया था.

क्राइम ब्रांच के आरोप पत्र के मुताबिक इस गैंगरेप और हत्याकांड में किशोर की अहम महत्वपूर्ण भूमिका थी. इस मामले आरोपी को बचाने और महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने के आरोपों के कारण एक सब इंस्पेक्टर और एक हेड कांस्टेबल को भी गिरफ्तार किया गया था.

जम्मू कश्मीर सरकार ने इस मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था, जिसने बलात्कार सह हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की थी. इसके बाद अपराध शाखा ने मामले में दो अलग – अलग आरोप पत्र दाखिल किए थे. एक 9 अप्रैल को 7 लोगों के खिलाफ और दूसरा 10 अप्रैल को आरोपी किशोर के खिलाफ दायर किया था. (इनपुट- एजेंसी)