नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 1 अप्रैल से राष्ट्रीय और प्रदेश राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी तक शराब बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट के इस फैसले में होटल और रेस्तरां में बिकने वाली शराब पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले के लागू होने के बाद देशभर में करीब 10 लाख नौकरियों पर संकट पैदा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार  सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकारें भी चिंतित हैं। इसीलिए शराब कारोबारी, रेस्तरां और होटल मालिकों के साथ राज्य सरकारें भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बचने के रास्ते तलाश रही हैं।

प्रदेश राजमार्गों को डिनोटिफाई करने की चालाकी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बचने के लिए राज्य सरकार ने राजमार्गों को डिनोटिफाई करना शुरू कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ ने प्रदेश राजमार्गों को डिनोटिफाई किया है। माना जा रहा है कि अन्य राज्य सरकारें भी हाईवे को डिनोटिफाई करके सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बच जाएंगी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राजमार्गों से 500 मीटर की दूरी पर शराब बिक्री नहीं की जाएगी। राजमार्गों को डिनोटिफाई करके कोर्ट के इस फैसले से बचा जा सकता है। राज्य सरकारें प्रदेश राजमार्गों को जिला राजमार्ग का दर्जा देने की तैयारी कर रही हैं। ऐसा हाईवे के किनारे स्थित शराब की दुकानों, होटल और रेस्तरां के कारोबार को बचाने के लिए किया जा रहा है। इन प्रदेश राजमार्गों को डिनोटिफाई करने से अब इन सड़कों के रख-रखाव का जिम्मा नगर निगम और जिला निकायों के पास आ जाएगा।

शराब कारोबारियों की चालाकी

सु्प्रीम कोर्ट के आदेश से बचने के लिए तरह-तरह की चालाकी दिखाई जा रही है। हाईवे से 500 मीटर की दूरी बनाने के लिए बार और रेस्तरां मालिक अपने प्रवेश द्वार को बदल रहे हैं। इससे हाईवे से उनकी दूरी बढ़ गई है और वो इस आदेश से बच गए हैं। शराब बिक्री से राज्य सरकारों को भी खूब राजस्व मिलता है। इसे देखते हुए राज्य सरकारें भी इस नियम को लागू करने में बहुत सख्ती करने से बच रही हैं। नियम से बचने के फेर में राज्य सरकारें भूल गई कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला हाईवे पर एक्सीडेंट में कमी लाने के उद्देश्य से किया है। अगर इसका तोड़ निकाल ही लिया जाएगा तो दुर्घटनाएं कैसे घटेंगी?