SC Verdict On Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए किसान आंदोलन पर आज बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी है और इसके साथ ही कोर्ट ने एक कमेटी का भी गठन किया है, जिसमें चार सदस्य हैं, जो कृषि कानूनों पर चर्चा करने के बाद कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे. इसके बाद कोर्ट कृषि कानून और किसान आंदोलन के बारे में आगे का फैसला देगी.Also Read - Covid Vaccination: टीकाकरण को लेकर Supreme Court में सरकार का जवाब, मर्जी के बिना टीका नहीं लग सकता

सुप्रीम कोर्ट की समिति में शामिल हैं ये चार सदस्य
भूपेंद्र सिंह मान, जो कि भारतीय किसान यूनियन के प्रेसिडेंट हैं.
डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, जो कि अंतरराष्ट्रीय नीति के प्रमुख हैं.
अशोक गुलाटी, जो कि कृषि अर्थशास्त्री हैं और
अनिल धनवत, जो कि शेतकारी संगठन, महाराष्ट्र के सदस्य हैं. Also Read - UP Assembly Election 2022: समाजवादी पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग, नाहिद हसन की उम्मीदवारी पर घिरी सपा

कोर्ट ने कहा-समिति चर्चा करने के बाद रिपोर्ट पेश करेगी Also Read - OBC Reservation: निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, गरमाई मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की राजनीति

कोर्ट ने कहा कि समिति इसलिए बनाई जा रही है ताकि इस मुद्दे को लेकर तस्वीर साफ हो, हम ये बहस नहीं सुनेंगे कि किसान समिति के सामने पेश नहीं होंगे. कोर्ट ने कहा कि ये कमेटी हमारे लिए होगी, ये कमेटी कोई आदेश नहीं जारी करेगी बल्कि आपकी समस्या सुनकर हम तक एक रिपोर्ट भेजेगी. कोर्ट ने कहा कि ‘अगर किसान सरकार के समक्ष जा सकते हैं तो कमिटी के समक्ष क्यों नहीं? अगर वो समस्या का समाधान चाहते है तो हम ये नहीं सुनना चाहते कि किसान कमिटी के समक्ष पेश नहीं होंगे.’

किसानों ने कहा-कानूनों का निलंबन नहीं, रद करें कानून

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसान संगठन का कहना है कि वो तबतक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे जबतक कृषि कानून को रद नहीं कर दिया जाता. किसान संगठनों की ओर से कल ही यह साफ कर दिया गया था कि कृषि कानूनों पर रोक का स्वागत है लेकिन हम किसी कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान गणतंत्र दिवस बाधित करने की आशंका वाली  दिल्ली पुलिस की उस आवेदन पर नोटिस जारी किया है, जिसमें गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली को रोकने की मांग की गई थी. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने किसान संगठनों को नोटिस भी जारी किया है.