नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के लोगों को आरक्षण देने के मसले पर आज एक बड़ा फैसला सुनाया है. इसके अनुसार अगर एससी/एसटी जाति के लोग एक राज्य में आरक्षण का लाभ लेते हैं, तो दूसरे राज्य में जाने पर उन्हें दोबारा यह लाभ नहीं मिलेगा. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि एक राज्य के एससी/एसटी समुदाय के सदस्य दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरी में आरक्षण के लाभ का दावा नहीं कर सकते, यदि उनकी जाति वहां एससी/एसटी के रूप में अधिसूचित नहीं है. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया. संविधान पीठ ने कहा कि किसी एक राज्य में अनुसूचित जाति के किसी सदस्य को दूसरे राज्यों में भी अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता, जहां वह रोजगार या शिक्षा के इरादे से गया है. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति एम. शांतानागौडर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं. संविधान पीठ ने कहा, ‘एक राज्य में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित व्यक्ति एक राज्य में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित होने के आधार पर दूसरे राज्य में इसी दर्जे का दावा नहीं कर सकता.’ न्यायमूर्ति भानुमति ने हालांकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एससी/एसटी के बारे में केन्द्रीय आरक्षण नीति लागू होने के संबंध में बहुमत के दृष्टिकोण से असहमति व्यक्त की. पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि जहां तक दिल्ली का संबंध है तो एससी/एसटी के बारे में केन्द्रीय आरक्षण नीति यहां लागू होगी. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

संविधान पीठ ने यह व्यवस्था उन याचिकाओं पर दी, जिनमें यह सवाल उठाया गया था कि क्या एक राज्य में एससी/एसटी के रूप में अधिसूचित व्यक्ति दूसरे राज्य में आरक्षण प्राप्त कर सकता है जहां उसकी जाति को एससी/एसटी के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है. पीठ ने इस सवाल पर भी विचार किया कि क्या दूसरे राज्य के एससी/एसटी सदस्य दिल्ली में नौकरी के लिए आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर भी सुनवाई चल रही है. इसमें कोर्ट को यह तय करना है कि क्या सरकारी नौकरी में एससी/एसटी को प्रमोशन में भी आरक्षण दिया जाए या नहीं. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

इधर, बिहार में कानून में संशोधन के खिलाफ प्रदर्शन
एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी के विभिन्न मामलों को लेकर सुनवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर बिहार में गुरुवार को एससी/एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में गई जगहों पर प्रदर्शन किया गया। राज्य के बेगूसराय, गया, पटना सहित विभिन्न इलाकों में सवर्ण समुदाय के लोग सड़क पर उतरे और इस कानून के विरोध में नारेबाजी की. गया सहित कई जिलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के साथ झड़प की भी सूचना है. पुलिस के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक दिवसीय ‘बिहार बंद’ के दौरान प्रदर्शनकारी सुबह से ही सड़कों पर उतर गए और सड़क जाम कर दिया. गया में गया-मानपुर मार्ग को प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया और अधिनियम का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया. पुलिस को आक्रोशित प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा. वहीं बेगूसराय में ब्राह्मण-भूमिहार एकता मंच के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और प्रदर्शन किया. लखीसराय और शेखपुरा में भी प्रदर्शन हुआ.

(इनपुट – एजेंसी)