नई दिल्ली. 15 दिन की शीतकालीन अवकाश के बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट खुल गया. कोर्ट इस साल 137 दिन छुट्टी पर रहेगा, जिसमें होली, दशहरा और दीपावली की छुट्टी भी शामिल है. 49 दिन की ग्रीष्मकालीन छुट्टी और 14 दिन की साल के अंत की छुट्टी शामिल है. हालांकि, हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में एक (13 में से) कोर्ट जरूरी मामलों की सुनवाई के लिए छुट्टियों के दौरान सुनवाई करेगा.Also Read - NEET UG PG Counselling 2021: सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सुनाया बड़ा फैसला, जानें

एक तरफ जहां इंस्टीट्यूशन का छुट्टियों का कोटा है, वहीं कोर्ट में इसे लेकर एक पीटीशन डाली गई है. इसमें कहा गया है कि कोर्ट में 3 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं. ऐसे में कोर्ट की छुट्टियों को कम करना चाहिए. इसमें यह भी मांग की गई है कि कोर्ट को एक दिन में कम से कम 6 घंटे और साल में 225 दिन फंक्शन में रहना चाहिए. Also Read - Covid Vaccination: टीकाकरण को लेकर Supreme Court में सरकार का जवाब, मर्जी के बिना टीका नहीं लग सकता

एक पक्ष का तर्क
हालांकि, पेंडिंग केस को लेकर तर्क दिया जाता है कि कोर्ट में जजों की संख्या अपर्याप्त है. हमारे पास एक मिलियन लोगों पर सिर्फ 13 जज हैं. इसकी तुलना ऑस्ट्रेलिया से करके कहा जाता है कि वहां 1 मिलियन लोगों पर 58 जज हैं. ब्रिटेन में एक मिलियन पर 100 जज तो अमेरिका में 130 जज हैं. Also Read - UP Assembly Election 2022: समाजवादी पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग, नाहिद हसन की उम्मीदवारी पर घिरी सपा

दूसरे पक्ष का तर्क
इसपर दूसरे पक्ष की तरफ से यह तर्क दिया जाता है कि जजों को भी छुट्टी लेना का पूरा अधिकार है. लेकिन, एक अनिवार्य छुट्टी की जगह उन्हें उनकी जरूरतों के हिसाब से छुट्टी देनी चाहिए. जिससे उन्हें छुट्टी भी मिले और केस पर भी प्रभाव न पड़े.

इस साल इन केसों पर रहेगी निगाह
न्यायपालिका संविधान का अभिन्न अंग है और किसी भी वक्त इसकी अनिवार्यता को कम नहीं आका जा सकता है. लेकिन साल 2019 में कुछ केस ऐसे हैं, जिसकी वजह से न्यायालय पर सबकी निगाह बनी रहेगी. इसमें अयोध्या में राम मंदिर, सीबीआई बनाम सीबीआई, सबरीमाला और जम्मू-कश्मीर रीसेटलमेंट एक्ट भी है.