नई दिल्ली: सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने के दो साल बाद लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा ने शुक्रवार को कहा कि सफलता पर शुरुआती खुशी स्वाभाविक है, लेकिन अभियान का लगातार प्रचार करना अनुचित है. जनरल हुड्डा 29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा के पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त उत्तरी सैन्य कमान के कमांडर थे. उरी में आतंकवादी हमले के जवाब में यह हमला किया गया था. जनरल हुड्डा यहां सैन्य साहित्य महोत्सव 2018 के पहले दिन ‘सीमा पार अभियानों और सर्जिकल स्ट्राइक की भूमिका’ विषय पर चर्चा में बोल रहे थे. Also Read - Surgical strike Day: भारतीय जवानों ने 4 साल पहले 'सर्जिकल स्ट्राइक' से ऐसे किया था आतंकियों का सफाया, पढ़ें शूरवीरों की गाथा

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि चर्चा में सर्जिकल स्ट्राइक मुख्य मुद्दा रहा. कई लोगों ने आलोचना कि इसका राजनीतिकरण किया गया.
आपको क्या लगता है. लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा ने कहा, मैं अपने मिलिट्री नजरिए से देख रहा हूं. सर्जिकल स्ट्राइक करना जरूरी था. उरी में हमारे कई जवान शहीद हुए थे. पाकिस्तान को एक स्ट्रोंग मैसेज देना जरूरी था और इसी तरह स्ट्रांग मैसेज जा सकता था कि अगर आप हमारे एरिया में आकर इस तरह की स्ट्राइक करेंगे तो हम भी आपके एरिया में आकर उसी तरह की और उससे बेहतर और बड़ी स्ट्राइक कर सकते हैं. हम बोलते हैं कि इसका राजनीतिकरण हो गया है. ये भी लगता है थोड़ी ओवरहाइप हो गई, थोड़ी पोलिटिसाइज हो गई. मिलिट्री के नजरिए से देखें तो यह बहुत सफल ऑपरेशन था. इसको हमें करने की बहुत जरूरत थी और हमने किया. Also Read - राफेल को भारत तक लाने वाले कश्मीरी पायलट हिलाल अहमद पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का भी हिस्सा थे

पंजाब सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक, इस कार्यक्रम में सेना के पूर्व जनरलों और कमांडरों के साथ पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह बदनोर शामिल हुए. युद्ध में भाग ले चुके कई अनुभवी अधिकारियों ने सैन्य अभियानों के ‘राजनीतिकरण’ के खिलाफ आगाह किया. लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने कहा कि सफलता को लेकर शुरुआती खुशी स्वाभाविक है लेकिन सैन्य अभियानों का लगातार प्रचार करना अनुचित है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बेहतर होता कि ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी गोपनीय रखी जाती.

कुछ दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा था कि अगर मनमोहन सिंह सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी तो उसे छुपाकर क्यों रखा गया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उदयपुर में सर्जिकल स्ट्राइक पर दिए गए बयान पर सिंह ने यह प्रतिक्रिया दी थी. राहुल ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ‘सैन्य फैसले’ को भी ‘राजनीतिक संपत्ति’ बना दिया जबकि यही काम पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार ने भी तीन बार किया था.

इस बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा था कि आज बता रहे हैं वे तब देश को क्यों नहीं बताया गया ? अगर हमारी सेना ने यदि अपने शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया था तो क्या इस देश को इस बात की जानकारी नहीं होनी चाहिए थी. क्यों सेना के शौर्य और पराक्रम को छिपाकर रखने की कोशिश की गयी? किसका भय था? मैं इस सवाल का जवाब चाहता हूं.

(इनपुट-एजेंसियां)