
Farha Fatima
फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया ... और पढ़ें
सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में हुई थी, जब उनका शव पंखे से लटका मिला. शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना, लेकिन सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में FIR दर्ज कराई, जिसमें रिया चक्रवर्ती और अन्य पर आत्महत्या के लिए उकसाने, धोखाधड़ी और अवैध कैद के आरोप लगाए गए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामला CBI को सौंपा गया. लगभग पांच साल की जांच के बाद, CBI ने मार्च 2025 में दो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कीं. एक पटना कोर्ट में सुशांत के पिता की शिकायत पर और दूसरी मुंबई कोर्ट में रिया की काउंटर-शिकायत पर.
क्लोजर रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक ने सुशांत के बांद्रा फ्लैट को 8 जून 2020 को छोड़ दिया था, यानी मौत से ठीक छह दिन पहले. CBI की जांच में पाया गया कि उसके बाद रिया या उनके परिवार ने फ्लैट का दौरा नहीं किया. सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी के बयान से पता चला कि सुशांत ने खुद रिया को अपना ‘परिवार का हिस्सा’ बताया था. यह खुलासा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि शुरुआती आरोपों में रिया पर सुशांत को ‘अवैध कैद’ में रखने का इल्जाम था, जो पूरी तरह खारिज हो गया. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि कोई सबूत नहीं मिला कि सुशांत को किसी ने रोका या प्रतिबंधित किया. इससे सवाल उठता है कि आखिर सुशांत के आखिरी दिनों में अकेलापन कितना गहरा था, जो डिप्रेशन को और बढ़ा सकता था. CBI ने फोरेंसिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स की पड़ताल के बाद यह निष्कर्ष निकाला, लेकिन परिवार का कहना है कि रिपोर्ट में बैंक स्टेटमेंट या चैट्स जैसे ठोस दस्तावेज नहीं हैं.
रिया चक्रवर्ती पर सबसे गंभीर आरोप आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकाने और मानसिक उत्पीड़न का था, लेकिन CBI ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया कि कोई डिजिटल, फिजिकल या गवाहों के बयान से ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जो रिया या उनके परिवार (माता-पिता इंद्रजीत और संध्या चक्रवर्ती, भाई शोविक) को सुशांत की मौत से जोड़े. AIIMS के फोरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट ने भी मौत को ‘आत्महत्या’ ही बताया, जिसमें कोई जहर या गला घोंटने का निशान नहीं था. यह खुलासा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि मीडिया ट्रायल ने रिया को ‘विलेन’ बना दिया था, जिसके चलते उन्हें 27 दिनों तक जेल में रहना पड़ा. रिया के वकील सतीश मानेशिंदे ने इसे ‘पूर्ण न्याय’ बताया, लेकिन सुशांत का परिवार इसे ‘शॉडी जांच’ कह रहा है. रिपोर्ट में साफ है कि रिया और सुशांत के बीच अप्रैल 2019 से जून 2020 तक लिव-इन रिलेशनशिप थी, जो सामान्य लग रही थी.
एक और चौंकाने वाली बात यह उभरकर आई कि सुशांत की बहन मीतू सिंह मौत से ठीक पहले 8 से 12 जून तक उनके फ्लैट पर रहीं. रिया की काउंटर-FIR में मीतू और अन्य बहनों (प्रियंका सिंह) पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर दवाइयां दीं, जो सुशांत के डिप्रेशन को बढ़ाकर मौत का कारण बनीं. लेकिन CBI ने इसे ‘hearsay’ (सुनने में आई बात) करार दिया, क्योंकि कोई मेडिकल रिकॉर्ड या डिजिटल प्रमाण नहीं मिला. रिपोर्ट में कहा गया कि दवाओं का मामला बिना सबूत के है, और बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले ही मीतू के खिलाफ केस खारिज कर दिया था. यह खुलासा इसलिए हैरान करने वाला है क्योंकि यह सुशांत के परिवार के सदस्यों को भी जांच के दायरे में लाता है, जबकि शुरुआत में फोकस सिर्फ रिया पर था. CBI ने सभी गवाहों के बयान और मेडिकल हिस्ट्री की जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट में इसे बंद कर दिया.
सुशांत के पिता ने आरोप लगाया था कि रिया ने 15 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पी, लेकिन क्लोजर रिपोर्ट ने इसे पूरी तरह नकार दिया. CBI ने पाया कि रिया ने फ्लैट छोड़ते समय सिर्फ अपना एप्पल लैपटॉप और रिस्टवॉच लिया, जो सुशांत ने उन्हें गिफ्ट किए थे. कोई सबूत नहीं मिला कि बाकी प्रॉपर्टी बेईमानी से या सुशांत की जानकारी के बिना ली गई. बैंक स्टेटमेंट्स और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की जांच से भी कोई फ्रॉड नहीं पाया गया. यह खुलासा चौंकाने वाला इसलिए है क्योंकि शुरुआती FIR में फाइनेंशियल मिसकंडक्ट को बड़ा मुद्दा बनाया गया था, जो अब आधारहीन साबित हुआ. रिपोर्ट में ED की पैरेलल जांच का भी जिक्र है, जो ड्रग्स एंगल पर थी लेकिन मौत से जुड़ी नहीं पाई गई. सुशांत का परिवार अब कह रहा है कि CBI ने बैंक स्टेटमेंट्स कोर्ट में पेश नहीं किए, जिससे रिपोर्ट ‘फ्लिम्सी’ लग रही है.
क्लोजर रिपोर्ट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि सुशांत की मौत एक ‘सिंपल केस ऑफ सुसाइड’ था, जिसमें कोई साजिश, हत्या या बाहरी दबाव नहीं था. CBI ने फोरेंसिक, क्राइम सीन एनालिसिस, AIIMS रिपोर्ट, अमेरिका से टेक्निकल डेटा और 100 से ज्यादा गवाहों के बयानों के आधार पर यह कहा. कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन डिप्रेशन और अकेलापन मुख्य कारण लगे. यह खुलासा इसलिए झकझोरने वाला है क्योंकि पांच सालों में बॉलीवुड साजिश, ब्लैकमेजिंग और राजनीतिक एंगल की थ्योरीज़ ने हवा भर दी थीं, जो सब खारिज हो गईं. सुशांत का परिवार रिपोर्ट को ‘eyewash’ बता रहा है और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि उनके अनुसार चैट्स, मेडिकल रिकॉर्ड्स और टेक्निकल एविडेंस पेश नहीं किए गए. पटना कोर्ट 20 दिसंबर 2025 को अगली सुनवाई करेगा. यह क्लोजर न केवल केस को बंद करता है, बल्कि मीडिया ट्रायल की विफलता को भी उजागर करता है.
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