नई दिल्ली: सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील विकास सिंह ने बुधवार को कहा कि एक्‍टर के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर परिवार को बदनाम करने और एक्‍ट्रेस रिया चक्रवर्ती को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ चैनलों द्वारा दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया जा रहा है. रिया पर अभिनेता को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है.Also Read - TV Serial Bal Shiv Launch: जानिए बाल शिव के स्टारकास्ट से सीरियल से जुड़ी कुछ अहम् बातें | Watch

वरिष्ठ अधिवक्ता ने मीडिया को से कहा कि सुशांत की तीन बहनें – प्रियंका, मीतू और रानी ने उन्हें बताया कि वे अभिनेता के मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में कुछ समाचार चैनलों द्वारा शुरू किए गए नकारात्मक और झूठे अभियान से बेहद दुखी हैं. Also Read - कोविड-19: सरकार ने निजी टीवी न्यूज चैनलों को नए हेल्पलाइन नंबर दिखाने के निर्देश दिए

वकील विकास सिंह ने कहा कि सुशांत के पिता द्वारा दर्ज की गई प्राथिमकी सार्वजनिक है और इसके बाद भी यह कहा जा रहा है कि परिवार को उनके अवसाद के बारे में पता था. उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”प्राथमिकी में स्पष्ट रूप जिक किया गया है कि सुशांत के जीवन में रिया के आने के बाद उन्हें मानसिक समस्याएं होने लगीं. यह भी उल्लेख किया गया है कि वह समस्याओं के लिए जिम्मेदार थी और वह मानसिक समस्याओं के कारण चिंतित थे.” Also Read - Shehnaaz Gill Hot Pics: फोटो खिंचवाने के लिए सड़क पर लेट गईं शहनाज गिल, सूरज को भी ज़मीं पर आना पड़ा

उन्होंने कहा कि रिया ने सुशांत के इलाज के बारे में कभी भी परिवार के सामने फाइलों का खुलासा नहीं किया. इसके अलावा जो साझा किया गया वह सिर्फ दवाइयों के बारे में थ न कि बीमारी के बारे में.

वरिष्ठ वकील ने कहा कि कुछ चैनलों द्वारा एक अभियान लगातार चलाया जा रहा है और यह परिवार की विनम्र अपील है कि वे शोक संतप्त परिवार की पीड़ा नहीं बढ़ाएं. सिंह ने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि सुशांत की जीवन बीमा पॉलिसी है और अगर आत्महत्या के कारण मृत्यु घोषित होती तो परिवार को पैसा नहीं मिलेगा. इसी लिए आत्महत्या की बात को बाद में आत्महत्या के लिए उकसाने में बदल दिया गया. उन्होंने कहा कि सुशांत की कोई जीवन बीमा पॉलिसी नहीं थी.

सुशांत के पिता के वकील ने यह भी कहा कि सुशांत के पिता और बहन ने फैसला किया है कि पिता की सहमति के बिना इस संबंध में किसी फिल्म या धारावाहिक का निर्माण नहीं होना चाहिए और न ही कोई किताब लिखी जानी चाहिए.