सतलुज यमुना लिंक नहर विवाद: पंजाब हरियाणा आमने-सामने, राज्यों की सीमा सील, भारी सुरक्षाबल तैनात

हालात पर नियंत्रण के लिए नेता अभय चौटाला की ऐहतियातन गिरफ्तारी और पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला की पैरोल को रद्द करने की मांग की।

Published date india.com Published: February 23, 2017 10:24 AM IST
Sutlej Yamuna Link Canal controversy: clashes in Punjab and Haryana, the state's borders sealed, heavy security deployed | सतलुज यमुना लिंक नहर विवाद: पंजाब हरियाणा आमने-सामने, राज्यों की सीमा सील, भारी सुरक्षाबल तैनात

सतलुज यमुना लिंक नहर मामले में विवाद गहराता जा रहा है। लिंक नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा दोनो राज्य आमने-सामने हैं। स्थिति को देखते हुए दोनों राज्यों की सीमा सील करते हुए बसों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है वहीं भारी सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं। इस मामले में इनेलो नेता अभय चौटाला और प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही नहर निर्माण के लिए हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना दिया है। अदालत ने फिर से अपने फैसले को दोहराया है और इसका सम्मान होना चाहिए।

इससे पहले इस मामले में पंजाब सरकार ने कहा था कि किसानो की दी गई जमीन वापस लेना संभव नहीं है। पंजाब सरकान ने ये बात सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए कही थी। पिछले साल अधिसूचना के बाद किसानों को दी गई जमीनों को वापस लेना संभव नहीं है। सुप्रीम को जवाब देते हुए पंजाब सरकार ने बताया कि ये केंद्र की जिम्मेदारी थी कि वो दो राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर मध्यस्थ की भूमिका अदा करें, लेकिन केंद्र ने ऐसा कभी नहीं किया। केंद्र सरकार ने कभी भी दोनों राज्यो के बीच चल रही जल बंटवारे की समस्या को खत्म करने की कोशिश नहीं की। केंद्र सरकार की ये जिम्मेदारी थी कि वो वाटर ट्रिब्यूनल का गठन करे लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने दिया लोकसभा से इस्तिफ़ा

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 20 फरवरी तक का वक्त दिया था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट सतलुज यमुना लिंक नहर मामले में हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हरियाणा ने पंजाब सरकार को नहर की जमीन किसानों को वापस देने से रोके जाने की मांग की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमीन वापस दिए जाने पर यथास्थिति बरकरार रखते हुए कमेटी से जमीनी हकीकत की रिपोर्ट भी मांग चुकी है।

वहीं इससे पहले हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलोद) द्वारा 23 फरवरी से पंजाब-हरियाणा सीमा पर विवादित पंजाब सतलज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर की खुदाई पर अड़ने के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को सेना की तैनाती की मांग की। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि हालात के बेकाबू होने से पहले इनेलोद तथा उसके नेताओं को काबू में करना जरूरी है।

उन्होंने हालात पर नियंत्रण के लिए इनेलोद के नेता अभय चौटाला की ऐहतियातन गिरफ्तारी और पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला की पैरोल को रद्द करने की मांग की।

अमरिंदर ने कहा, “हालात खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। मुद्दे पर अभय चौटाला का अड़ियल रुख तथा सेना के बुलाए जाने के बाद भी सतलज यमुना लिंक नहर की खुदाई करने की उनकी धमकी, उनकी ऐहतियातन गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार है।”

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इनेलोद नेतृत्व द्वारा कथित तौर पर कानून को खुली चुनौती देने तथा सतलज यमुना नहर मुद्दे पर पंजाब में आतंकवाद के दोबारा सिर उठाने के संकेत की खुफिया रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमरिंदर ने चेतावनी दी कि अगर इनेलोद कार्यकर्ता नहर की खुदाई करने के लिए पंजाब का रुख करते हैं, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।

सतलुज यमुना लिंक नहर विवाद को इन बिंदुओं से समझे

  • हरियाणा से पानी समझौता तोड़ने वाला पंजाब का 2004 का कानून मान्य नहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने नहर का काम पूरा करने को कहा था।
  • गौरतलब है कि 2002 और 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की तरफ पड़ने वाली नहर के हिस्से को पूरा करने को ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार को दी थी।
  • 2004 में पंजाब ने पानी समझौते को रद्द करने का कानून पास कर दिया। राष्ट्रपति ने पूछा था कि क्या कोई राज्य एकतरफा ऐसा कदम उठा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट के ‘न’ कहने के बाद अब हरियाणा सरकार को पुराने फैसले के अमल के लिए औपचारिक आदेश लेना होगा। कोर्ट ने आज जो कहा है उसे राष्ट्रपति की तरफ से भेजे गए सवाल का जवाब माना जाएगा।

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