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नदियों को जोड़ने वाली योजना के तहत सतलुज-यमुना लिंक नहर यानी कि SYL परियोजना पर कोर्ट में चल रहे मामले पर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि इस मुद्दे पर हर हाल में कोर्ट का आदेश लागू होना चाहिए। आदेश लागू कैसे होगा, यह देखना सरकारों का काम है।
इस मामले में न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने कहा कि, ‘हम इस न्यायालय द्वारा पारित डिक्री का उल्लंघन करने की इजाजत नहीं देंगे और इस पर अमल करना ही होगा।’ इस डिक्री पर कैसे अमल हो रहा है यह संबंधित पक्षों का सिरदर्द है।
पीठ ने न्यायालय के आदेशों पर अमल के लिए हरियाणा की याचिका पर केन्द्र और पंजाब राज्य को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि यथास्थिति बनाए रखने संबंधी अंतरिम आदेश बरकरार रहेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को की जाएगी।
कोर्ट ने इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार से एक हफ्ते में और पंजाब सरकार से 3 हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने दिया लोकसभा से इस्तिफ़ा
गौरतलब है कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी है कि जब तक पंजाब का जल समझौता कानून रद्द नहीं होगा, तब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो पाएगा। इस पर पंजाब सरकार ने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में मामले की सुनवाई मार्च के तीसरे हफ्ते में की जाए।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और पूरा मामला …
हरियाणा से पानी समझौता तोड़ने वाला पंजाब का 2004 का कानून मान्य नहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने नहर का काम पूरा करने को कहा था।
गौरतलब है कि 2002 और 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की तरफ पड़ने वाली नहर के हिस्से को पूरा करने को ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार को दी थी।
2004 में पंजाब ने पानी समझौते को रद्द करने का कानून पास कर दिया। राष्ट्रपति ने पूछा था कि क्या कोई राज्य एकतरफा ऐसा कदम उठा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के ‘न’ कहने के बाद अब हरियाणा सरकार को पुराने फैसले के अमल के लिए औपचारिक आदेश लेना होगा। कोर्ट ने आज जो कहा है उसे राष्ट्रपति की तरफ से भेजे गए सवाल का जवाब माना जाएगा।
इस वीडियो में समझे इस विवाद की पूरी जड़
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