
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और खबरों की दुनिया में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. ऋषभ टेक और Off-Beat से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी रखते ... और पढ़ें
Neelkanth Varni Statue: अक्षरधाम फ्लाइओवर से आने-जाने वाले लोगों की नजर एक विशाल और ऊंची सुनहरी प्रतिमा पर टिक जाती है. दोनों हाथ ऊपर उठाए और एक पैर पर खड़ी यह प्रतिमा अक्षरधाम मंदिर परिसर में लगाई जा रही है. अभी इसका आधिकारिक अनावरण नहीं हुआ है. फिलहाल इस मूर्ति का निर्माण कार्य अभी जारी है लेकिन इसकी ऊंचाई और चमक दूर से ही लोगों का ध्यान खींच लेती है. आसपास के रास्तों और फ्लाइओवर से गुजरने वाले लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर यह भव्य प्रतिमा किसकी है?
अक्षरधाम मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज पर इस प्रतिमा से जुड़ी जानकारी दी गई है. इसके अनुसार यह प्रतिमा भगवान श्रीस्वामिनारायण के बाल्यकाल के स्वरूप श्रीनीलकंठ वर्णी की है. प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 108 फीट बताई गई है. यह मूर्ति उनकी कठोर तपस्या की अवस्था को दर्शाती है. यह तप, त्याग और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक मानी जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिमा का विधिवत अनावरण और पूजन मार्च 2026 के अंत में किया जाएगा, हालांकि इसकी सटीक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है.
इस विशाल प्रतिमा में श्रीनीलकंठ वर्णी को एक पैर पर खड़े हुए दिखाया गया है. उनके दोनों हाथ आकाश की ओर उठे हुए हैं और वे गहरे ध्यान में लीन हैं. यह वही योग मुद्रा है, जिसमें उन्होंने नेपाल के प्रसिद्ध तीर्थ मुक्तिनाथ में कठिन तपस्या की थी. महीनों तक एक ही स्थान पर स्थिर रहकर की गई यह साधना उनकी असाधारण इच्छाशक्ति और आत्मसंयम को दर्शाती है. यह प्रतिमा उनकी पवित्र तीर्थयात्रा और मानव कल्याण के लिए किए गए तप की याद दिलाती है.
भगवान स्वामिनारायण का जन्म वर्ष 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया गांव में हुआ था. बचपन में उनका नाम घनश्याम था. मात्र 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने गृह त्याग कर संन्यास लिया और ‘नीलकंठ वर्णी’ नाम धारण किया. इसके बाद उन्होंने लगभग सात वर्षों तक पैदल यात्रा की और करीब 12 हजार किलोमीटर का सफर तय किया. इस यात्रा में उन्होंने भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान और बांग्लादेश के कई तीर्थस्थलों के दर्शन किए और लोगों को अध्यात्म का संदेश दिया.
श्रीनीलकंठ वर्णी की भव्य प्रतिमाएं केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी स्थापित हैं. गुजरात के गांधीनगर स्थित अक्षरधाम में 49 फीट ऊंची प्रतिमा है. अमेरिका के न्यू जर्सी के रॉबिंसविले, ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में भी उनकी विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं.
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