Taksh And Pushkal Sons Of Lord Rams Brother Bharat Where Is Their Kingdom Now
भगवान राम के प्रिय भाई भरत के दो बेटों का आज के पाकिस्तान में यहां था राज
भगवान राम के प्रिय भाई थे भरत और भरत के दो प्रिय पुत्र थे, जिनका नाम तक्ष और पुश्कल था. इन दोनों का राज जिस क्षेत्र में था, वह क्षेत्र आज पाकिस्तान में है. जानिए आज कहां हैं वह क्षेत्र.
भगवान राम के साथ भले ही हमेशा लक्ष्मण रहते हों, लेकिन राम को भरत से बड़ा प्रेम था. इस बात को गोस्वामी तुलसीदास हनुमान चालीसा की एक चौपाई में कुछ इस तरह से कहा है – लाय सजीवन लखन जियाये, श्रीरघुबीर हरषि उर लाये। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई। इसमें भगवान राम अपने परमभक्त हनुमान की तुलना अपने प्रिय भाई भरत से करते हैं. इन्हीं भरत के दो पुत्र थे, जिनके नाम तक्ष और पुश्कल थे. इन दोनों का राज आज के पाकिस्तान में था. चलिए जानते हैं यह पूरी कहानी.
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम, राजा राम बन चुके थे और अयोध्या से राज चला रहे थे. इसी समय उनके प्रिय भाई भरत के मामा और कैकेय के राजा युद्धजीत अयोध्या आए. युद्धजीत ने बताया कि गांधार के गंधर्व उन्हें परेशान कर रहे हैं. इस पर भरत ने अपने बड़े भाई से आज्ञा मांगी और अपने पुत्र तक्ष व पुश्कल के साथ अपने मामा की मदद करने के लिए कैकेय पहुंच गए. भरत ने गंधर्वों को हराकर उस इलाके को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया.
इस पूरे क्षेत्र को अपने अधिकार में लेने के बाद यहां पर दो शहर बसाए गए. भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर तक्षिला नगरी बसाई गई, जहां ईशा पूर्व बनी तक्षिला युनिवर्सिटी बहुत ही मशहूर रही है. इसके अलावा दूसरे शहर का नाम उनके पुत्र पुश्कल के नाम पर पुश्कलावत या पुश्कलावती रखा गया. भरत के दोनों पुत्रों को क्रमश: वहां का राजा बनाया गया. कुछ वर्ष बाद भरत वापस अयोध्या लौट आए.
आज कहां हैं तक्षशिला और पुश्कलावत?
जैसा कि आप जानते हैं तक्षशिला आज पाकिस्तान में मौजूद है. तक्षशिला को प्राचीन समय के मशहूर किंगडम गांधार की राजधानी भी कहा जाता है. गांधार का यह राज्य सिंधु नदी के दोनों ओर फैला हुआ था. यह आज के पाकिस्तान में रावलपिंडी जिले में स्थित है. जबकि पुश्कलावती आज पाकिस्तान में खैबर पख्तुनख्वा प्रांत में स्वात नदी के किनारे वहां स्थित है, जहां यह नदी काबुल नदी से मिलती है. यह इलाका आज पाकिस्तान में मशहूर आर्कियोलॉजिकल साइट है.
लक्ष्मण पुत्र का राज
जब भरत अपने पुत्रों का राज स्थापित करके वापस अयोध्या लौटे तो उसके बाद उन्हें अपने छोटे भाई लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु के साथ भेजा गया. चंद्रकेतु के साथ जाकर भरत ने लक्ष्मण के इस पुत्र के लिए मारू किंगडम की स्थापना की. चंद्रकेतु मारू के राजा बने और भरत ने उन्हें राजपाट का कामकाज सिखाया. इसके बाद भरत वापस अयोध्या लौट गए. लक्ष्मण के पुत्र चंद्रकेतु का यह मारू किंगडम कहीं और नहीं बल्की मरुस्थल नगरी जैसलमेर और उसके आसपास के इलाके हैं.
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