
Farha Fatima
फ़रहा फ़ातिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2015 में LIVE India में इंटर्नशिप से की. प्रारंभिक दौर में ही उन्होंने जामिया ... और पढ़ें
तमिलनाडु सरकार ने ‘Coldrif’ नामक खाँसी की दवा की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह कदम मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद उठाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों को संदेह है कि दवा में जहरीला रसायन मिला हुआ हो सकता है. इस पूरे मामले को विस्तार से समझिए.
सितंबर में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा ज़िले में अचानक एक-एक करके कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी थी. किसी को तेज़ बुखार हुआ, किसी को उल्टियां होने लगीं, तो किसी के गुर्दे (किडनी) ने काम करना बंद कर दिया. परिवार वाले हैरान थे “इतने छोटे बच्चों को आखिर हुआ क्या?” डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन मौत का सिलसिला नहीं रुका. कुछ ही दिनों में 9 मासूम बच्चे दुनिया छोड़कर चले गए. इसी दौरान राजस्थान से भी दो बच्चों की मौत की खबर आई.जांच में सामने आया कि जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से ज़्यादातर को एक ही दवा ‘Coldrif’ नाम का खांसी का सिरप दिया गया था. परिवारों ने बताया “बच्चे को बस खाँसी थी, हमने दवा दी… लेकिन हालत बिगड़ती चली गई.” यहीं से शक की सुई इस सिरप पर टिक गई.
यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम ज़िले के सुंगुवर्चत्रम इलाके की एक दवा कंपनी बनाती है.यहीं से यह दवा राजस्थान, मध्य प्रदेश और पुडुचेरी जैसे राज्यों में सप्लाई की जाती थी.
अधिकारियों ने सिरप की जांच शुरू की. उन्हें आशंका है कि इसमें ‘Diethylene Glycol (DEG)’ नाम का केमिकल मौजूद हो सकता है. यह ज़हरीला पदार्थ है जो गाड़ियों के ब्रेक ऑयल और मशीनों में इस्तेमाल होता है. अगर यह गलती से भी किसी दवा में चला जाए तो यह सीधे किडनी और लिवर को बर्बाद कर देता है. यही वजह है कि बच्चों की मौत को इस सिरप से जोड़कर देखा जा रहा है.
बच्चों की मौत की खबर फैलते ही तमिलनाडु सरकार ने तुरंत एक्शन लिया.
-1 अक्टूबर से Coldrif सिरप की बिक्री पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया.
-फैक्ट्री से दवा के सैंपल उठाकर सरकारी लैब में भेजे गए.
-कंपनी को आदेश दिया गया कि उत्पादन तुरंत रोका जाए.
-बाजार में बचा हुआ स्टॉक भी जब्त कर लिया गया.
केंद्र सरकार ने भी बड़ा कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर दी. दो साल से छोटे बच्चों को कफ और कोल्ड सिरप बिल्कुल न दिया जाए.
मामला अब सिर्फ दवा या फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहा. राजनीति भी इसमें कूद पड़ी. कांग्रेस नेता कमलनाथ ने सीधा आरोप लगाया, “बच्चों की मौत का कारण यही है कि दवा में ब्रेक ऑयल जैसा सॉल्वेंट मिला दिया गया. यह सीधी-सीधी लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा ग़लती है.” तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक सरकारें सख़्त हो गई हैं.
फिलहाल दवा के नमूने प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजे गए हैं. सभी की नज़र अब लैब की रिपोर्ट पर है, जो सच सामने लाएगी. अगर रिपोर्ट में साबित हो गया कि सिरप में जहरीला केमिकल था, तो कंपनी पर कड़ी कार्रवाई तय है.
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