नई दिल्ली|तमिलनाडु में हिंदी को लेकर एक बार फिर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। इस बार विरोध हाइवे पर लगाए जा रहे साइनबोर्ड्स को लेकर है। तमिलनाडु में डीएमके सहित कई क्षेत्रीय दल दक्षिणी राज्यों से गुजर रहे राजमार्गों पर हिंदी में साइनबोर्ड्स लगाने पर आपत्ति जता रहे हैं। ये दल चाहते हैं कि इसकी जगह तमिल या अंग्रेजी के साइन बोर्ड्स लगाए जाएं।

डीएमके अध्यक्ष एमके स्टॉलिन ने कहा कि अगर बीजेपी ने हिंदी को तमिल भाषा के आगे तरजीह देने की कोशिश की तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं मारुमालरची द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एमडीएमके) और पट्टली मक्कल काछी (पीएमके) जैसे श्रेत्रीय राजनीतिक दलों ने भी इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है। इन दलों के लोगों का कहना है कि सरकार साइनबोर्ड्स पर अंग्रेजी में अंकित तमिलनाडु के गांव और शहरों के नाम हिंदी में बदलती जा रही है।

पीएमके संस्थापक एस रामदास ने गुरुवार को केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस कदम से तमिलनाडु के लोगों में असंतोष है। एक बयान में उन्होंने कहा कि हांलाकि अभी जहां भी साइन बोर्ड्स लगाए जा रहे हैं उनमें जगहों के नाम तमिल और हिंदी दोंनों में अंकित हैं लेकिन इससे पर्यटक और विदेशी राज्य में नहीं आएंगे। यह भी पढ़ें: जंतर मंतर पर नरमुंडों के साथ प्रदर्शन कर रहे तमिलनाडु किसानों से मिलने पहुंचे राहुल गांधी

रामदास ने बताया दिंडिवनम और कृष्णगिरी से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगे माइल स्टोन्स पर गांव और शहरों के नामों को हिंदी में बदल दिया गया है। वहीं एमडीएमके महासचिव वाइको ने रामदास की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि कुछ लोग तमिल भाषी लोगों पर हिंदी फिर से थोपने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले शुक्रवार से ही एनएच-75 और एनएच-77 पर कई जगहों के नामों को अंग्रेजी से हिंदी में बदल दिया गया है।

बता दें तमिलनाडु में हिंदी को लेकर ये विरोध नया नहीं है। 1937 के समय राज्य में हिंदी को लेकर ऐसा विरोध हुआ था जिसने दंगे और हिंसक झड़पों का रूप ले लिया था। उस समय इस विवाद में दो लोगों की मौत भी हो गई थी।