चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में विशेष अदालत ने जगतार सिंह तारा को शनिवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. तारा के वकील सिमरनजीत सिंह ने बताया कि अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश जे एस संधू ने उच्च सुरक्षा वाले बुड़ैल जेल में सजा का ऐलान किया है, जहां तारा कैद है. उन्होंने कहा कि अदालत ने तारा पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. तारा को सजा का ऐलान होने के बाद खालिस्तान के समर्थन में कुछ लोगों ने नारे भी लगाए. Also Read - किसानों के मुद्दे पर भिड़े दो सीएम, अमरिंदर सिंह बोले- मनोहर लाल खट्टर मेरे मोबाइल पर फोन कर सकते थे

वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल फैसले को ऊपरी अदालतों में चुनौती नहीं देगा. तारा पर हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. तारा ने 1995 में बेअंत सिंह की हत्या में संलिप्तता की बात स्वीकार की थी. तारा ने आरोप स्वीकार करने से संबंधित पत्र इस वर्ष जनवरी में अदालत को सौंपा था. चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के बाहर 31 अगस्त 1995 को एक विस्फोट में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह मारे गए थे. इस घटना में 16 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी.

तारा को उम्रकैद की सजा दिए जाने पर शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुख्य सचिव रूप सिंह ने कहा, ”जगतार सिंह तारा ने बेअंत सिंह का कत्ल किसी जमीन या प्रोपर्टी विवाद में नहीं किया था बल्कि इमोशन में बहकर किया था, किसी का कत्ल करना गलत है लेकिन तारा को 22 साल बाद सजा दी गई है, ये तारा के परिवार के लिए और सिख समाज के लिए तकलीफदेह है”

जगतार तारा के वकील ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सजा का ऐलान होने के बाद तारा ने कोर्ट में कहा कि उसे बेअंत सिंह की हत्या करने पर कोई पछतावा नहीं है और वो सिख समाज के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा.

पंजाब पुलिस के कर्मचारी दिलावर सिंह ने इस घटना में मानव बम की भूमिका निभाई थी. तारा को सितम्बर 1995 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था. तारा और दो अन्य आरोपी मामले की सुनवाई के दौरान 2004 में बुड़ैल जेल से फरार हो गए थे लेकिन बाद में तारा को 2015 में थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था.

(इनपुट: पीटीआई)