नई दिल्‍ली: अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाली बांग्‍लादेश से निर्वासित मशहूर लेखिका तस्‍लीमा नसरीन एक बार फिर चर्चा में हैं. हालांकि इस दफा वे अपनी टिप्‍पणी के बजाए अपने एक फैसले को लेकर सुर्खियां बटोर रहीं हैं. तस्‍लीमा नसरीन ने मौत के बाद अपने शरीर को दफनाने की बजाय एम्स में रिचर्स के लिए दान देने का फैसला किया है. इसकी जानकारी उन्‍होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर दी है. साथ ही उन्‍होंने ट्वीट में एम्स के डिपार्टमेंट ऑफ एनॉटमी की डॉनर स्लिप भी साझा की. तस्‍लीमा नसरीन के फैसले पर ट्विटर पर यूजर उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं.

 

बता दें कि तस्‍लीमा नसरीन अक्‍सर अपनी टिप्पणियों को लेकर कट्टरपंथियों के निशाने पर रही हैं. सन 1962 में बांग्‍लादेश में पैदा हुईं तस्‍लीमा नसरीन के पास स्वीडन की नागरिकता भी है. उपन्यास लज्जा में इस्लाम पर की गई टिप्पणी से तस्लीमा ने कट्टरपंथी मुस्लिमों को नाराज कर दिया था. इसके बाद वे कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई थी और कट्टरपंथियों ने उनकी मौत पर इनाम भी घोषित कर दिया था. इसके बाद साल 1994 में वह स्वीडन चली गई थी और वर्ष 2005 में भारत आने के बाद से वह यहीं पर रह रहीं हैं.

इस्‍लाम पर ट्वीट कर फिर रहीं थीं चर्चा में
बता दें कि जब ढाका में आतंकियों ने एक रेस्टोरेंट में हमला कर 20 लोगों की हत्या कर दी थी. तब तस्लीमा नसरीन ने ट्वीट करके कहा था कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद कीजिए. इसके बाद उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा था कि आपको इस्लामिक आतंकवादी बनने के लिए गरीबी, अज्ञानता, अमेरिका की विदेश नीति, इजरायल की साजिश नहीं चाहिए, बस आपको इस्लाम चाहिए. तस्लीमा नसरीन एक मुसलमान हैं, लेकिन वह खुद को नास्तिक मानती हैं और देश के विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए मशहूर हैं.