रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों पर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है. तसलीमा ने एक तरफ भारत की चिंताओं को तवज्जो दी, वहीं दूसरी तरफ रोहिंग्या शरणार्थियों की दयनीय स्थिति को लेकर भी अपनी निराशा जाहिर की.
तसलीमा ने कहा कि मैं चाहती हूं कि भारत सरकार रोहिंग्या को शरण दे, लेकिन अगर इनसे सुरक्षा को खतरा है तो इसके बारे में भारत सरकार मुझसे बेहतर जानती होगी. बांग्लादेश से निर्वासित तसलीमा ने कहा कि भारत की सुरक्षा से समझौता करना अच्छी बात नहीं होगी, लेकिन मैं इस बात से भी चिंतित हूं कि रोहिंग्या जाएंगे कहां?
Not a good idea to compromise with India’s security bt I’m worried where those Rohingyas will go:Bangladeshi author in exile Taslima Nasreen pic.twitter.com/G5zpy4eKFc
रोहिंग्या मुस्लिमों को देश से बाहर करने पर आज (सोमवार) केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दे चुकी है. इसमें सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों के पाकिस्तानी आतंकियों से संबंध हैं और ये भारत के लिए खतरा बन सकते हैं. कई रोहिंग्या आईएस, अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं.
इसमें कहा गया है कि सिर्फ देश के नागरिकों को ही देश के किसी भी हिस्से में रहने का मौलिक अधिकार है और गैरकानूनी शरणार्थी इस अधिकार के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इससे पहले, चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ को केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सूचित किया था कि इस मामले में सोमवार को ही हलफनामा दाखिल किया जाएगा. पीठ ने मेहता के कथन पर विचार के बाद रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को वापस भेजे जाने के खिलाफ दो रोहिंग्या मुस्लिम मोहम्मद सलीमुल्ला और मोहम्मद शाकिर की जनहित याचिका पर सुनवाई 3 अक्टूबर के लिये स्थगित कर दी.
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केंद्र सरकार ने कहा है कि चूंकि भारत इस संधि का अथवा प्रोटोकॉल में पक्षकार नहीं है, इसलिए इनके प्रावधान भारत पर लागू नहीं होते हैं. कोर्ट ने इस याचिका पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को नोटिस जारी नहीं किया जिसके पास पहले से ही यह मामला है. आयोग ने केंद्र को 18 अगस्त को नोटिस जारी किया था. इस जनहित याचिका में दावा किया गया है कि वे संयुक्त राष्ट्र शरणार्थियों के उच्चायोग के तहत पंजीकृत शरणार्थी हैं और उनके समुदाय के प्रति बडे़ पैमाने पर भेदभाव, हिंसा और खूनखराबे की वजह से म्यांमार से भागने के बाद उन्होंने भारत में शरण ली है.
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