नई दिल्ली: आयकर विभाग ने हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स पर छापे और तलाशी के दौरान 1,350 करोड़ रुपए से अधिक की कर चोरी पकड़ी है. यह कंपनी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे की है. यह सौर ऊर्जा क्षेत्र में काम करती है. बता दें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को कहा कि यह छापे इस महीने की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर, भोपाल, इंदौर और गोवा में मारे गए  थे.  आयकर (अन्वेषण) महानिदेशालय ने अहम और विश्वसनीय सूचना के आधार पर छापे मारे हैं. यह सूचना कंपनी में बड़े पैमाने पर बिना हिसाब किताब वाली संपत्ति के संग्रह, उसे रखने और इधर- उधर करने से संबंधित थी. हालांकि, सीबीडीटी ने अपने बयान में कंपनी का नाम नहीं लिया है. Also Read - Bihar Polls 2020: दूसरे फेज के चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने खेला आबादी के हिसाब से आरक्षण का दांव, कही यह बात...

सूत्रों के मुताबिक, कमलनाथ के भतीजे राहुल पुरी की कंपनी हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 7 अप्रैल को छापे मारे गए थे. सीबीडीटी ने कहा कि ये छापे विश्वसनीय सूचना के आधार पर मारे गए और इसमें 1,350 करोड़ रुपए से अधिक कर चोरी पकड़ी गई. पुरी से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दौरान पूछताछ की जा चुकी है. Also Read - How To Get Rid Of Hicky: लव बाइट के निशान ने कर दिया है परेशान तो जानें किन तरीको से उनसे पाएं छुटकारा

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा कि यह सौर ऊर्जा कंपनी एक समूह से संबंधित है, जिस पर 7 अप्रैल को आयकर महानिदेशालय के दिल्ली इकाई ने छापेमारी की थी. आयकर विभाग ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी सहयोगी और अन्य पर कर चोरी और हवाला लेनदेन के आरोपों में छापेमारी की थी। ये छापे देश भर में 52 स्थानों पर मारे गए थे, जिसमें 300 अधिकारी शामिल हुए थे. Also Read - HPBOSE Class 12th Compartment Result 2020 Declared: हिमाचल प्रदेश बोर्ड ने जारी किया कंपार्टमेंट परीक्षा का रिजल्ट, इस Direct Link से करें चेक

इस मामले में, जांच इकाई ने ‘विश्वसनीय जानकारी के आधार पर’ कई स्थानों पर लगाया तलाशी और जब्ती अभियान चलाया था, जिसमें एनसीआर, भोपाल, इंदौर और गोवा में कई ठिकाने शामिल है. प्रमुख सौर कंपनी पर आईटी के छापों में छद्म कंपनियों का उपयोग कर 370 करोड़ रुपए ठिकाने लगाने की जानकारी मिली.
सीबीडीटी ने एक बयान में कहा, “330 करोड़ रुपए की रकम फर्जी बिल बनाकर हवाला ऑपरेटरों द्वारा डॉलर के रूप में ठिकाने लगा दिए गए. “