नई दिल्ली: तीन राजधानी के प्रस्ताव पर आंध्र प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र से पहले तेदेपा प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को मुख्यमंत्री वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी से अपील की कि राज्य की राजधानी को अमरावती से नहीं हटाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे करीब 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश वापस हो जाएगा और किसानों को भी कष्ट उठाना पड़ेगा.

अपने कार्यकाल के दौरान अमरावती को राजधानी बनाए जाने में किसी भी तरह की ‘अनियमितताओं’ से इंकार करते हुए नायडू ने कहा कि अमरावती में उनका कोई ‘निहित स्वार्थ’ नहीं था. उन्होंने कहा कि पार्टी राज्य को होने वाले किसी अन्य क्षति को नियंत्रित करने के लिए लड़ रही है. उन्होंने आरोप लगाए कि आंध्र प्रदेश ‘विनाश की राह’ पर है. नायडू ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अगर समझौतों का सम्मान नहीं किया तो इससे राज्य की छवि खराब होगी और भविष्य के निवेश के लिए निवेशकों का विश्वास खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य पहले ही ऋणग्रस्त है. पिछले वर्ष मई में सत्ता संभालने वाली वाईएसआरसीपी सरकार ने ठेके देने और तत्कालीन मुख्यमंत्री के करीबी लोगों को मुख्य भूमि आवंटित करने में पूर्ववर्ती नायडू सरकार द्वारा अनियमितताएं करने के आरोप लगाए. विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष शीत सत्र 20 जनवरी से शुरू होगा ताकि उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा स्वीकृत ‘डिस्ट्रीब्यूटेड कैपिटल फंक्शंस’ को मंजूरी दी जा सके. मुख्यमंत्री चाहते हैं कि विशाखापत्तनम में कार्यकारी राजधानी हो, अमरावती में विधायी राजधानी हो और कुर्नूल में न्यायिक राजधानी बने.

तीन राजधानी बनाने का कोई ‘तर्क नहीं’
विजयवाड़ा में नायडू ने कहा कि तीन राजधानी बनाने का कोई ‘तर्क नहीं’ है. उन्होंने सरकार की प्रस्तावित योजना को तेलुगु देशम पार्टी के खिलाफ अभियान करार दिया. नायडू ने कहा कि जब निर्माण इतना आगे चरण में पहुंच चुका है तो राजधानी बदलने का क्या मतलब है? करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश का संकल्प जताया गया है जिससे राज्य में करीब 50 हजार नौकरियों के सृजन की संभावना है. अस्पताल से शिक्षा केंद्र तक करीब 130 संस्थान बनने हैं. अगर राजधानी बदलती है तो ये सब नहीं होंगे. अमरावती के विकास पर दस हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. तेदेपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर राजधानी बदली तो पर्यावरण क्षति की समस्या भी आएगी क्योंकि जमीन का इस्तेमाल कृषि के लिए नहीं किया जा सकेगा.