नई दिल्ली। कुछ दिनों पहले ही सरकार से अलग होने का फैसला लेने वाली तेलुगुदेशम पार्टी ने आज एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया है. आज हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में ये फैसला लिया गया. आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के मुद्दे पर आंध्र के सीएम और टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने ये फैसला लिया है. इसी मुद्दे पर ही नायडू ने सरकार से अलग होने का फैसला लिया था जिसके बाद टीडीपी के दो मंत्रियों अशोक गजपति राजू और वाई एस चौधरी ने इस्तीफा दे दिया था. Also Read - हनुमान बेनीवाल का सनसनीखेज आरोप: वसुंधरा राजे ने गहलोत के साथ मिलकर बचाई कांग्रेस सरकार, विधायकों को फोन किए

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इस फैसले के साथ टीडीपी के 16 सांसद एनडीए से बाहर हो गए हैं. दो मंत्री पहले ही एनडीए सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं. इस तरह अब एनडीए में 312 सांसद ही रह गए हैं. शिवसेना पहले ही बाहर हो चुकी है. इसके साथ ही टीडीपी ने केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का भी फैसला लिया है. इससे पहले खबर आई थी कि टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस की ओर से लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेगी. इससे पहले गुरुवार को वाईएएसआर ने केंद्र सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था. आज इसे लेकर पार्टी की तरफ से लोकसभा सेक्रेटरी को पत्र भी भेज दिया गया. Also Read - राजद के साथ कोई 'नज़दीकियां' नहीं, हम NDA के साथ मजबूती से हैं: जदयू

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50 सांसदों का चाहिए समर्थन

हालांकि, प्रस्ताव को तभी स्वीकार किया जा सकता है जब सदन में उसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन हासिल हो. वाईएसआर कांग्रेस के लोकसभा में 9 सदस्य हैं. अगर इसे स्वीकार कर लिया जाता है तो यह मोदी सरकार के खिलाफ लाया जाने वाला पहला अविश्वास प्रस्ताव होगा. वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख जगनमोहन रेड्डी ने विभिन्न दलों के नेताओं को पत्र लिखकर प्रस्ताव के लिए समर्थन मांगा है. पत्र में उन्होंने कहा है कि अगर केंद्र राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर अनिच्छुक रहता है तो उसके सभी सांसद छह अप्रैल को इस्तीफा दे देंगे.

सरकार के खिलाफ YSR कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, TDP का मिला समर्थन

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536 सदस्यीय लोकसभा में भाजपा के 273 सदस्य हैं जबकि सहयोगी दलों के 56 सदस्य हैं. अगर अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है तो निश्चित तौर पर यह गिर जाएगा, लेकिन यह राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है. साथ ही 2019 में भी बीजेपी के लिए मुश्किल भरा साबित होगा. आंध्र प्रदेश में बीजेपी को दोनों ही पार्टियों के साथ नहीं मिलता है तो मिशन 2019 के लिए दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं.