बिहार: वोटिंग से पहले तेज प्रताप यादव की बढ़ी मुश्किलें, दर्ज हुई FIR, जानिए क्या है मामला?

Bihar Assembly Election 2025: महुआ विधानसभा सीट से नामांकन करने के बाद तेज प्रताप पर FIR दर्ज हुई. खबर के माध्यम से जानते हैं पूरा मामला क्या है और पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

Published date india.com Published: October 20, 2025 5:23 PM IST
Tej Pratap attacks younger brother Tejashwi, says, 'people of Bihar will decide who...'
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बिहार में विधानसभा चुनाव की वोटिंग से पहले लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप की मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन पर आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन करने का मामला दर्ज हुआ है. वैशाली जिला पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर को तेज प्रताप के नामांकन जुलूस के दौरान उनके काफिले में एक गाड़ी पर पुलिस लोगो और नीली बत्ती लगी थी. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद क्षेत्र अधिकारी ने थाने में शिकायत दर्ज करा दी.

यहां समझें पूरा घटनाक्रम

जिला पुलिस ने बताया, तेज प्रताप यादव अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ महुआ पहुंचे थे. उनके नामांकन जुलूस में शामिल गाड़ियों में एक गाड़ी पर पुलिस का लोगो और नीली बत्ती लगी हुई थी. वायरल वीडियो में यह साफ-साफ दिखाई दे रहा था, जिसे लेकर चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगाया गया. मामले की जांच करने पर पता चला कि गाड़ी पर लगी बत्ती और लोगो निजी गाड़ी पर थी – यानी यह कोई सरकारी वाहन नहीं था, लेकिन इसका चुनावी रैली में उपयोग नियमों का उल्लंघन माना गया.

पुलिस ने तुरंत की कार्रवाई

न्यूज एजेंसी पीटीआई को डीएसपी 1 राज कुमार शाह ने बताया वायरल वीडियो में दिखाई गई गाड़ी सिद्धनाथ सिंह के बेटे प्रमोद कुमार यादव की निजी गाड़ी थी. चुनाव प्रचार में इस गाड़ी का इस्तेमाल करना और पुलिस लोगो के साथ नीली बत्ती लगाना गंभीर और संज्ञेय अपराध माना गया. बाद में गाड़ी के मालिक और ड्राइवर के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया और कार को जब्त कर लिया गया. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने और नियमों की सही तरीके से पालना सुनिश्चित करने के लिए की गई है.

तेज प्रताप की छवि पर असर पड़ेगा

इस घटना ने तेज प्रताप यादव की चुनावी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि गाड़ी निजी थी और तेज प्रताप सीधे तौर पर इसका मालिक नहीं थे, लेकिन उनका नामांकन जुलूस इसमें शामिल था. इस तरह के मामले आमतौर पर चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में आते हैं और उम्मीदवारों को सतर्क रहने की चेतावनी देते हैं. अब मामला आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, और यह देखना होगा कि तेज प्रताप यादव और उनके पार्टी कार्यकर्ता इस विवाद से कैसे निपटते हैं. इस घटना ने चुनावी आचार संहिता की गंभीरता और नियमों का पालन करने की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है.

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