नई दिल्ली. तेलंगाना में विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान को अब कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में चुनाव में खड़े उम्मीदवार विरोधियों के खिलाफ प्रचार के लिए राजनीतिक हथकंडों के साथ-साथ टोने-टोटके तक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. यही वजह है कि जब बीते दिनों कर्नाटक से लगी तेलंगाना की सीमा पर पुलिस ने पक्षियों का शिकार करने वाले एक गिरोह को दबोचा, तो पता चला कि ये तस्कर तेलंगाना के एक नेता के कहने पर कर्नाटक से उल्लू पकड़-पकड़ कर पहुंचा रहे हैं. उल्लुओं के शिकारियों ने पुलिस को बताया कि तेलंगाना के एक नेता ने उन्हें उल्लुओं का ऑर्डर दिया है, ताकि वे चुनाव में इनका इस्तेमाल विरोधियों को हराने में कर सकें. बता दें कि पश्चिमी देशों में जहां उल्लू को बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है, वहीं भारत के कई इलाकों में इस पक्षी को दुर्भाग्य के तौर पर देखा जाता है. इसीलिए तेलंगाना के नेता ने चुनाव में खड़े अपने विरोधियों के भाग्य को दुर्भाग्य में बदलने के लिए कर्नाटक से उल्लुओं को मंगाने का आइडिया ढूंढ निकाला.

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एक उल्लू की कीमत 3 से 4 लाख रुपए
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, कर्नाटक के वन विभाग के अधिकारियों ने शिकारियों के कब्जे से जिन उल्लुओं को पकड़ा था, वह इंडियन ईगल आउल (Indian Eagle Owl) कहलाते हैं. कर्नाटक में इस उल्लू को कोंबिना गूब के नाम से भी जाना जाता है. वन विभाग के अनुसार ये शिकारी 3 से 4 लाख रुपए तक की कीमत में इन उल्लुओं को बेचने की योजना बना रहे थे. निर्जन स्थानों पर रहने और रात में जागते रहने की प्रवृत्ति के कारण उल्लू को अपने देश में दुर्भाग्य लाने वाले पक्षी के तौर पर जाना जाता है. वहीं, तांत्रिक क्रियाओं में भी इसकी उपयोगिता को समझते हुए, लोग इसके प्रति नकारात्मक धारणा रखते हैं. देश के कई इलाकों में काला जादू जैसी क्रियाओं में भी इसके उपयोग की बात सामने आती रहती है. कहा जाता है कि उल्लू के सिर, आंख, पंख और पैर आदि काटकर दुश्मन के घर में फेंकने से मनोवांछित कार्य सफल होते हैं. इन धारणाओं के बरक्स आप तेलंगाना के नेताओं की उल्लू ऑर्डर करने की ख्वाहिश को समझ सकते हैं.

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पक्षी-प्रेमियों को सता रही उल्लुओं की चिंता
तेलंगाना में होने वाले विधानसभा चुनावों के मतदान के लिए अब भी तीन से चार दिन शेष हैं. ऐसे में कर्नाटक के पक्षी-प्रेमियों को राज्य में रहने वाले उल्लुओं की चिंता सता रही है. दरअसल, पिछले कुछ दिनों में बेंगलुरू, मैसूर और बेलगावी इलाके से भी पक्षी तस्करों के पास से उल्लुओं को जब्त करने की खबरें आई हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कर्नाटक के पक्षी-प्रेमियों को लगता है कि तेलंगाना में चुनाव होने तक उनके राज्य के उल्लुओं पर यह खतरा मंडराता रहेगा. कर्नाटक के कलबुर्गी इलाके के सहायक वन संरक्षक आरआर यादव ने अखबार को चिंता जताते हुए बताया कि कर्नाटक से उल्लुओं का व्यापार नई बात नहीं है. लेकिन दिनों-दिन यह कारोबार बढ़ता ही जा रहा है और उल्लू तस्करी का नेटवर्क व्यापक रूप लेता जा रहा है. कलबुर्गी से पकड़े गए जिन दो उल्लुओं को उन्होंने छुड़ाया, उसके बारे में यादव ने कहा कि कर्नाटक में मिलने वाले उल्लू का वजन 5 किलो तक का होता है. ये पक्षी अमूमन पहाड़ी इलाके या चट्टानों से भरे हुए जंगल में पाए जाते हैं.