हैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा के लिये 22 नवंबर को गजवेल विधानसभा क्षेत्र से पर्चा भरने के बाद से कथित तौर पर लापता एक उम्मीदवार को मंगलवार को हैदराबाद हाई कोर्ट के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने एक दिन पहले ही पुलिस को उम्मीदवार को पेश करने का निर्देश दिया था. Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

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न्यायमूर्ति राघवेंद्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति एम सत्यनारायण मूर्ति की खंडपीठ ने सोमवार को पुलिस को निर्देश दिया था कि वह समाजवादी फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे के दिनेश चक्रवर्ती को मंगलवार को सवा दो बजे से पहले अदालत के समक्ष पेश करे. इसी के अनुरूप, पुलिस ने दिनेश को पेश किया. दिनेश ने अदालत को बताया कि वह न तो गायब हुए थे और न ही किसी ने उनका अपहरण किया था. उन्होंने कहा कि वह सुरक्षित थे. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

उम्मीदवार ने अदालत को बताया कि उन्होंने स्वैच्छिक रूप से अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया था और उनकी पार्टी को इस बारे में पता है. उन्होंने हालांकि कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में कुछ संवादहीनता थी. उम्मीदवार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने मामला बंद कर दिया.

तेलंगाना चुनाव: सोनिया गांधी की रैली के बाद बदल रहे हैं समीकरण, टीआरएस से कड़ा मुकाबला

बता दें कि तेलंगाना में 119 सीटों पर विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सात दिसम्बर को होंगे. मुख्‍य मुकाबले में एक तरफ सत्ताधारी टीआरएस है तो दूसरी तरफ पीपुल्स अलायंस. पीपुल्स अलायंस में कांग्रेस, टीडीपी, सीपीआई और तेलंगाना जन समिति जैसी पार्टियां हैं. तेलंगाना के सीएम और टीआरएस नेता केसीआर ने जिस समय विधानसभा भंग की थी और समय से पहले चुनाव में कूदे थे तो माहौल एक तरफा था. राजनीति के विशेषज्ञों का कहना था कि टीआरएस एक बार फिर सरकार बनाने में सफल होगी और चंद्रशेखर राव एक बार सीएम बनेंगे. लेकिन कांग्रेस ने चंद्रबाबू नायडू के साथ मिलकर जिस तरह का गठबंधन तैयार किया है, उससे मुकाबले में रोमांच आ गया है.