नई दिल्ली. सरकार ने जबरन छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से कम कर दिया है. बृहस्पतिवार को जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया कि सीबीआई के तीन अन्य अधिकारियों संयुक्त निदेशक अरुण कुमार शर्मा, उपमहानिरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक जयंत जे नाईकनवरे के कार्यकाल में भी कटौती की गई है. ताजा आदेश ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया था और उन्हें दमकल, सिविल डिफेंस और होम गार्ड का महानिदेशक नियुक्त किया गया था.

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वर्मा ने नया पद लेने से इंकार कर दिया था और कहा था कि वह पुलिस सेवा से पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं. कैबिनेट की अप्वांइटमेंट कमेटी के इस आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए. कार्मिक विभाग की ओर से जारी इस आदेश को राकेश अस्थाना के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है. अस्थाना के ऊपर मांस कारोबारी मोईन कुरैशी केस में रिश्वत लेने का आरोप है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकार प्राप्त कमेटी के सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा को हटाए जाने के फैसले के बाद, एक हफ्ते के भीतर यह दूसरा अवसर है जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी एक बार फिर सुर्खियों में आई है. खासकर राकेश अस्थाना समेत 4 अफसरों के कार्यकाल घटाए जाने के फैसले को अहम माना जा रहा है.

आपको बता दें कि सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ एजेंसी ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था और दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने वाला आदेश सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में दिया था. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के इतिहास में सरकार के हस्तक्षेप का यह अपनी तरह का पहला मामला था. सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आलोक वर्मा ने जहां सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, वहीं राकेश अस्थाना भी कोर्ट की शरण में हैं. वर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उनके पद पर बहाल तो कर दिया, लेकिन भ्रष्टाचार संबंधी मामले को लेकर कहा था कि इस बारे में सीबीआई निदेशक का चयन करने वाली कमेटी ही फैसला करेगी. इस कमेटी ने बीते दिनों हुई बैठक के बाद आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था.

(इनपुट – एजेंसी)