नई दिल्ली| कश्मीर घाटी में अशांति फैलाने के लिए पाकिस्तान से काम करने वाले आतंकवादी संगठनों को धन मुहैया कराने के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फिर से छापा मारा और विदेशी मुद्रा जब्त की. जम्मू एवं कश्मीर के पांच स्थानों पर छापेमारी में अहम दस्तावेज व विदेशी मुद्राएं जब्त की.

एनआईए के एक प्रवक्ता के अनुसार तलाशी के दौरान पाकिस्तानी रूपए और यूएई एवं सउदी अरब की मुद्रा के साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज मिले और उन्हें जब्त किया गया. अधिकारियों ने बताया कि सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले तहरीक ए हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर और गीलानी एक अन्य करीबी सहयोगी पीर सैफुल्ला के घर पर छापा मारा गया.

हुर्रियत कांफ्रेंस ने एनआईए की छापेमारी को बदले की कार्रवाई करार दिया गया है. सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक के साझा बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार कश्मीर के कारोबारियों को बदनाम कर रही है. बयान में आरोप लगाया गया है कि एनआईए की कार्रवाई कश्मीर के आंदोलन को कमजोर करने की साजिश है. कश्मीर घाटी में चार जगहों और जम्मू इलाके में एक स्थान पर छापेमारी का विरोध किया गया.

हुर्रियत नेताओं ने बुलाई बैठक

एनआईए की कार्रवाई के खिलाफ रणनीति तय करने के लिए हुर्रियत नेताओं ने सोमवार को 11 बजे श्रीनगर में बैठक बुलाई है. बैठक में हुर्रियत के तमाम बड़े नेता शामिल होंगे. हालांकि सैयद अली शाह गिलानी पहले से नजरबंद हैं. मीरवाइज को भी नजरबंद किया जा सकता है जिससे अलगाववादियों की मीटिंग नाकाम हो सके.

एजेंसी ने शनिवार को भी श्रीनगर, दिल्ली व हरियाणा में कई जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें एक करोड़ रुपए से ज्यादा नकदी, प्रतिबंधित आतंकवादी समूह लश्कर ए तैयबा के लेटरहेड व सुराग देने वाले दस्तावेज जब्त किए गए थे.

कश्मीर में एनआईए के छापे की निंदा करते हुए अलगाववादी धड़े ने केंद्र सरकार के ऐसे मनमाने कदम के खिलाफ गंभीर परिणाम और सड़कों पर प्रदर्शन करने की धमकी दी है.

कश्मीर घाटी में विध्वंसक गतिविधियां चलाने के लिए अलगाववादी समूहों द्वारा कथित रूप से धन हासिल करने के मामले के सिलसिले में एनआईए ने कल भी कश्मीर, हरियाणा और दिल्ली के 23 स्थानों पर छापेमारी की थी.

हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़े के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाईज उमर फारूक तथा जेकेएलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक ने बयान में कहा कि हम दिल्ली को चेतावनी देते हैं कि अगर इन चीजों को नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. अगर ये अनावश्यक छापेमारी नहीं बंद की गई तो लोग सड़कों पर उतरेंगे और पूरी ताकत और इच्छाशक्ति से इन मनमाने उपायों का विरोध करेंगे.