नई दिल्‍ली: भारतीय सेना पाकिस्‍तान की हर नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब दे रही है. बीते रविवार को भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्‍तान के छह से 10 सैनिक मारे गिराए और चार आतंकी कैंप ध्‍वस्‍त कर दिए. मीडियाकर्मियों ने सोमवार को जब जम्‍मू-कश्‍मीर के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक से जब आमतौर पर युद्ध में उपयोग की जाने वाले आर्टिलरी गन के उपयोग को लेकर पूछा तो उन्‍होंने कहा, ” टेरोरिस्‍ट कैम्‍प को हम बिलकुल बर्बाद कर देंगे, और अगर ये नहीं बाज आए तो हम अंदर जाएंगे.”

बता दें कि रविावर को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने पुष्‍ट‍ि करते हुए बताया था कि जम्मू कश्मीर के तंगधार और केरन सेक्टर के दूसरी तरफ भारतीय सेना द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में छह से 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और तीन आतंकी शिविर नष्ट कर दिए गए है.

आर्मी चीफ ने कहा कि भारतीय सैनिकों की कार्रवाई में एक अन्य आतंकी शिविर को गंभीर नुकसान पहुंचा है. साथ ही, नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को जवाबी कार्रवाई में खासा नुकसान पहुंचा है.

सेना प्रमुख ने नई दिल्‍ली में एक कार्यक्रम के दौरान अलग से मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों की कार्रवाई में एक अन्य आतंकी शिविर को गंभीर नुकसान पहुंचा है. साथ ही, नियंत्रण रेखा के दूसरी तरफ आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे को जवाबी कार्रवाई में खासा नुकसान पहुंचा है. पाकिस्तान के अकारण गोलीबारी के बाद जवाब में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय सेना ने रविवार को भारी हथियारों से पीओके में नीलम घाटी में चार आतंकी कैंप और कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था.

पाक सेना बेशर्म, भारतीय कार्रवाई से किया इनकार
पाकिस्तान सेना भारतीय आर्मी की इस कार्रवाई को झूठा बता रहा है और ऐसे दावे कर रहा है कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है. पाक सेना ने कहा कि भारत अपने दावों को सही साबित’’ करने के लिए किसी भी विदेशी राजनयिक या मीडिया को घटनास्थल पर ला सकता है. इसके बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने आधी रात को ट्वीट करके भारतीय सेना प्रमुख के दावे पर निराशा जताते हुए कहा, ‘भारतीय सेना प्रमुख का यह बयान निराशाजनक है, क्योंकि वह बहुत जिम्मेदारी वाले पद पर हैं.

बता दें कि भारतीय सेना जब भी पाकिस्‍तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करती तो पाक‍ सेना बेशर्मी से इसे झूठा बताने की कोशिश करती है फिर बाद में धीरे-धीरे आधी-अधूरी बात मानने लगता है. ऐसा ही कुछ रवैया पाकिस्‍तान का बालाकोट और सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद भी रहा था.