नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए दिशा-निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट को कवायद करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन डिजिटल मीडिया पर नियंत्रण की ज़रूरत है. इससे हिंसा फ़ैल रही है. डिजिटल मीडिया ज़हर फैला रहा है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक हलफनामे में कहा कि अगर शीर्ष अदालत इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के लिए दिशा-निर्देशों को रखना आवश्यक समझती है, जिसकी आवश्यकता नहीं है, तो अदालत को डिजिटल मीडिया के साथ पहले अभ्यास शुरू करना चाहिए. केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि डिजिटल मीडिया पूरी तरह से अनियंत्रित है. Also Read - महाराष्ट्र के CM उद्धव ठाकरे ने BJP को दी चुनौती- 'हिम्मत है तो गिराकर दिखाएं मेरी सरकार'

हलफनामे में कहा गया है कि वेब-आधारित डिजिटल मीडिया पर पूरी तरह से कोई जांच-पड़ताल नहीं है और इससे न केवल हिंसा बल्कि जहरीली घृणा फैलती है. इसमें कहा गया है कि यह संस्थानों और व्यक्तियों की छवि को धूमिल करने में भी सक्षम है. शीर्ष अदालत में सुदर्शन न्यूज विवाद के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को विनियमित करने की आवश्यकता से संबंधित एक सवाल पर सरकार की प्रतिक्रिया आई है. शीर्ष अदालत ने यूपीएससी जिहाद नामक सुदर्शन न्यूज चैनल के कार्यक्रम के पांच एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगा दी थी. Also Read - Bihar Assembly Election 2020: बीच चुनाव नीतीश से 'दूरी' बनाने लगी भाजपा, 10 नवंबर को राज्य में बदलेगा नेतृत्व!

हलफनामे में कहा गया है, अगर यह अदालत व्यापक मुद्दों से निपटने की इच्छा रखती है तो डिजिटल मीडिया के साथ शुरूआत करना बिल्कुल जरूरी होगा. हलफनामे में आगे कहा गया है कि ब्रॉडकास्टर और प्रकाशक, जब उन्हें पता चला है कि वे निश्चित सामग्री के लिए रडार पर हैं, तो हो सकता है कि वे उसी चीज को प्रकाशित करने के लिए डिजिटल मीडिया का उपयोग करना शुरू कर दें, क्योंकि इसमें कोई नियम नहीं है. Also Read - Bihar Polls 2020: बिहार में पहले चरण के चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन, कई दिग्गजों की रैलियां- मतदान 28 को...