नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि बहुसंख्यक वाद की धारण से देश की प्रगति की रफ्तार में बाधा पड़ेगी. एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक रघुराम राजन ने यह बात अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में लेक्चर के दौरान कही. इसके साथ ही उन्होंने मंदी पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का दुनिया में एक अहम योगदान है लेकिन इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था का मंदी के दौर से गुजरना चिंता का विषय है.

अपने लेक्चर में उन्होंने इस बात को भी लोगों को बताया कि किस प्रकार से राजकोषीय घाटे का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने कहा कि हर देश की सरकार में बैठे उच्च लोगों को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो.

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पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत को भी अपनी नीतियों के बारे में मजबूती के साथ अध्ययन करना होगा ताकि वो विश्व पटल पर तेजी के साथ आगे बढ़ सके. उन्होंने कहा कि पिछले कई साल में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन पिछले कुछ वक्त से इसकी रफ्तार कुंद हुई है. उन्होंने कहा कि 2016 में भारत की विकास दर 9 प्रतिशत थी जिसमें हाल ही में गिरावट दर्ज की गई है.

राजन ने कहा कि सरकार के सभी अंगों को मिलकर काम करना होगा तभी देश को प्रगति के मार्ग पर ले जाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि एक आदमी के काम से देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने कहा कि हमें इस बात को भी स्वीकार करना होगा कि हमने कुछ निर्णय जल्दबाजी में लिए.