चंडीगढ़. रॉ के पूर्व प्रमुख ए.एस. दौलत ने सैन्य साहित्य उत्सव में शनिवार को यहां कहा कि 1999 में करगिल संघर्ष से पहले करगिल की चोटियों पर घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई थी. पंजाब सरकार की ओर से एक बयान में कहा गया है कि ‘विस्डम ऑफ स्पाइज’ (जासूसी का ज्ञान) विषय पर चर्चा के दौरान दौलत ने कहा कि जंग से पहले सेना द्वारा इकट्ठा की गई जानकारी के साथ खुफिया रिपोर्ट को केंद्र के साथ साझा किया गया था. दौलत संघर्ष के वक्त खुफिया ब्यूरो में थे. उन्होंने कहा कि अहम जानकारियां तत्कालीन गृह मंत्री एल.के. आडवाणी के साथ साझा की गई थीं, उस वक्त वह देश के उप प्रधानमंत्री थे. Also Read - मन की बात: PM ने कहा, पाकिस्‍तान ने बड़े-बड़े मंसूबे पालकर भारत की भूमि हथियाने का दुस्‍साहस किया था

बयान में बताया गया है इससे पहले, ले. जनरल (सेवानिवृत्त) कमल डावर ने तीनों रक्षा इकाइयों को एकीकृत कमान में रखने की अहमियत को रेखांकित किया. खुफिया मामलों में एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) के दखल को लेकर आगाह करते हुए डावर ने कहा कि सूचनाएं होना एक चीज है और सभी उपलब्ध जानकारियों पर कार्रवाई करना दूसरी चीज है. ले. जनरल (सेवानिवृत्त) संजीव के लोंगर ने सामूहिक एकीकृत कमान के मुद्दे पर अलग विचार रखते हुए कहा कि भारत जैसे देश में हमें विभिन्न प्रमुखों की जरूरत हैं जो साथ आकर एक अहम फैसले में योगदान दें. Also Read - Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस के मौके पर राजनाथ सिंह और अमित शाह ने जवानों को दिया ट्रिब्यूट

पूर्व रॉ प्रमुख के बयान को सैन्य साहित्य महोत्सव में बीते शुक्रवार को लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी.एस. हुड्डा के सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर दिए गए बयान से जोड़कर देखा जा रहा है. नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने के दो साल बाद रिटायर्ड सैन्य अधिकारी हुड्डा ने कहा था कि सफलता पर शुरुआती खुशी स्वाभाविक है, लेकिन इस अभियान का लगातार प्रचार किया जाना सही नहीं है. बता दें कि जनरल हुड्डा 29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा के पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त उत्तरी सैन्य कमान के कमांडर थे. उरी में आतंकवादी हमले के जवाब में यह हमला किया गया था. हालांकि हुड्डा के बयान के बाद भारतीय थलसेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने शनिवार को कहा कि 2016 का सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान के किसी तरह के दुस्साहस को रोकने के लिए एक कामयाब रणनीतिक अभियान था. Also Read - लेफ्टिनेंट जनरल YK जोशी उत्तरी कमान के कमांडर नियुक्त, कश्मीर में आतंक रोधी अभियानों का है अनुभव