नई दिल्ली: बांग्लादेश के दूत सैयद मुअज्जम अली ने यहां शुक्रवार को बताया कि भारत ने बांग्लादेश से कहा है कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का क्रियान्वयन एक आंतरिक मामला है जिसे आंतरिक रूप से ही सुलझाया जाएगा. अली ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि यह उनका आंतरिक मामला है और यह आंतरिक रूप से ही सुलझाया जाएगा, इसलिए बांग्लादेश को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.’’

अली ने यहां भारतीय महिला प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) में कहा कि असम में एनआरसी क्रियान्वयन के बाद अभी तक किसी को बांग्लादेश वापस नहीं भेजा गया है और किसी को वापस नहीं भेजा जाएगा क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के किसी आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा.

भाजपा प्रमुख अमित शाह ने लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल में बयान दिया था कि उनकी पार्टी सत्ता में आने के बाद बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकाल देगी. अली ने इस संबंध में किए गए सवाल के जवाब में कहा, ‘‘अभी तक, उन्होंने (भारत ने) द्विपक्षीय स्तर पर यह मुद्दा नहीं उठाया है. हमने चुनाव से पहले इस प्रकार के बयान देखे थे. हम भारत सरकार से बात करते हैं और किसी राजनीतिक प्रचार के बारे में बात नहीं करते.’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश को भरोसा दिलाया है कि दोनों देशों के बीच तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. अली ने कहा, ‘‘इन सभी (द्विपक्षीय) घटनाक्रमों एवं प्रगति के बीच कुछ मामलों पर असंतोष भी है, और आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह मामला तीस्ता जल बंटवारा समझौता है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें फिर भरोसा दिलाया है कि इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और हम इस पर हस्ताक्षर करना चाहते हैं.’’

उन्होंने बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यामां जल्दी प्रत्यर्पण के मामले को भी उठाया. अली ने कहा, ‘‘हमारे देश में करीब 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों ने शरण ली है. हमें भारत ने उदार होकर सहायता दी है. उसने शिविरों में सर्वाधिक राहत सामग्री भिजवाई है, लेकिन 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों का विस्थापन हमारी सुरक्षा को बड़ा खतरा है और उन्हें पूर्ण नागरिकता एवं पूर्ण अधिकार के साथ उनके देश प्रत्यर्पित करना आवश्यक है ताकि उन्हें अपने घर छोड़ने नहीं पड़ें.’’

उन्होंने कहा कि अब यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दायित्व है कि वह रोहिंग्या शरणार्थियों के जल्द से जल्द प्रत्यर्पण को लेकर दबाव बनाए. अली ने साथ ही कहा, ‘‘दोनों देशों (भारत एवं बांग्लादेश) के बीच सुरक्षा सहयोग का अहम क्षेत्र रहा है.’’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा सहयोग दोनों देशों की इस इच्छा पर आधारित है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और देश की जमीन पर किसी आतंकवादी गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी. अली ने कहा कि भारत और बांग्लादेश को द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के लिए व्यापार एवं निवेश, कनेक्टिवटी और ऊर्जा के तीन अहम क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. बांग्लादेश के चीन के साथ संबंध से जुड़े प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वे मुख्य रूप से व्यापार एवं निवेश से जुड़े हैं.

(इनपुट भाषा)