नई दिल्ली। साध्वी से रेप केस मामले में पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया है. 28 अगस्त को कोर्ट सजा का ऐलान करेगी. लेकिन बाबा के ऊपर यह एक अकेला केस नहीं है. हम आपको बताने जा रहे हैं एक पत्रकार की कहानी जिसने इस बलात्कार मामले पर राम रहीम की करतूतों की पोल खोल दी थी.

‘पूरा सच’ नाम का अखबार निकालने वाले पत्रकार राम चंदेर छत्रपति ने बलात्कार पीड़ित साध्वियों की चिट्ठी प्रकाशित की थी जिससे राम रहीम खासे नाराज हुए थे. कुछ दिनों बाद 24 अक्टूबर 2002 को छत्रपति के घर के बाहर कुछ लोगों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया. जिसमें उनकी मौत हो गई. उनका बेटा अंशुल आज भी अपने पिता की मौत का इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रहा है.

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स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने पत्रकार छत्रपति से जुड़ा एक पुराना संस्मरण लिखा है. योगेंद्र यादव ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘जब भी मैं डेरा सच्चा सौदा के बारे में सुनता हूँ, मुझे 20 अक्टूबर 2002 की याद आ जाती है। उस दिन मैं हरियाणा के शहर सिरसा में था, जो डेरे के मुख्यालय के नज़दीक है. मुझे वहां के अखबार “पूरा सच” के संपादक रामचंद्र छत्रपति जी ने “वैकल्पिक राजनीती और मीडिया की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देने के लिए बुलाया था.’

योगेंद्र आगे लिखते हैं कि एक ईमानदार और साहसी पत्रकार के रूप में छत्रपति जी की ख्याति और सिरसा शहर की पंजाबी और हिंदी की साहित्यिक मण्डली ने मुझे अभिभूत किया था. भाषण के बाद छत्रपति जी मुझे दूध-जलेबी खिलाने ले गए. वहीँ सड़क के किनारे बैठकर मैं उनसे डेरा सच्चा सौदा के बारे में सुनने लगा. उन्होंने मुझे पहली बार एक साध्वी द्वारा बाबा के खिलाफ यौन शोषण के आरोप के बारे में बताया. डेरे के अंदर की बहुत ऐसी बातें बतायीं जो मैं यहाँ लिख नहीं सकता. यह सुनकर मैंने कहा “अगर ये धर्म है तो अधर्म क्या है?”

योगेंद्र यादव ने आगे लिखा, ‘छत्रपति जी मुस्कुराये, बोले ये बोलने की किसी में हिम्मत नहीं है. कोई वोट के लालच में चुप है, कोई पैसे के लालच में चुप है. लेकिन “पूरा सच” में हमने साध्वी की चिठ्ठी छाप दी है. उससे बाबा बौखलाए हुए हैं. चिठ्ठी छपने के महीने के अंदर उसे लीक करने के शक में भाई रंजीत सिंह की हत्या कर दी गयी. सुनकर मैं सिहर गया. पूछा “रामचंद्र जी, आपको खतरा नहीं है”? बोले “हाँ कई बार धमकियाँ मिल चुकी हैं, क्या होगा कोई पता नहीं. लेकिन कभी न कभी तो हम सबको जाना है.”

योगेंद्र ने लिखा कि चार दिन बाद खबर आयी कि रामचंद्र छत्रपति के घर पर हमलावरों ने उन्हें पांच गोलियां मारी. कुछ दिन के बाद छत्रपति जी चल बसे. हरियाणा सरकार (उन दिनों चौटाला जी की लोक दल की सरकार थी) ने हत्या की ढंग से जांच तक नहीं करवाई, पूरे प्रदेश के पत्रकारों के विरोध के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया. बाबा के नजदीकी लोग इस क़त्ल के मुख्य आरोपी हैं, फैसला आना बाकी है.

योगेंद्र के शब्दों में, ‘जब भी बाबा का कोई केस कोर्ट में लगता है, उनके हज़ारों अनुयायी कोर्ट को घेर लेते हैं (वैसे अभी तक किसी जज पर हमले की खबर नहीं है) उसके बाद आयी कांग्रेस और बीजेपी दोनों सरकारें डेरे के सामने नतमस्तक रही हैं. डेरे के लोग हर चुनाव से पहले खुल्लमखुल्ला पार्टियों से वोट की डील करते हैं. 2014 के हरियाणा विधान सभा चुनाव में डेरे ने बीजेपी को समर्थन दिया था. चुनाव जीतने के बाद खट्टर जी तो अपनी पूरी कैबिनेट को सिरसा लेकर बाबा का धन्यवाद करने गए थे!’

By Aditya Dwivedi