AIIMS nurses strike: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की नर्सों ने अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए सोमवार शाम से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है. नर्सिंग स्टाफ की बड़ी मांग है कि सेंट्रल पे कमीशन के छठे वेतनमान की विसंगतियां दूर की जाएं. नर्सों प्रमुख मांगों में से एक है छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना, बेहतर पारिश्रमिक सुनिश्चित करना. एम्स नर्सिंग एसोसिएशन का कहना है कि उनकी 23 मांग में से एक भी मांग पूरी नहीं की गई है. Also Read - AAP विधायक सोमनाथ भारती को 2 साल की सजा, मारपीट मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि यह दुखद है कि नर्सों की यूनियन इन कठिन समय के दौरान हड़ताल पर चली गई है. डॉ. रणदीप गुलेरिया ने नर्सिंग कर्मचारियों से ड्यूटी पर वापस लौटने की अपील की. उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संघ ऐसे समय में हड़ताल पर चला गया है जब केवल कुछ महीनों महीने बचे हैं कि टीका आने वाला है. मैं सभी नर्सों और नर्सिंग अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे हड़ताल पर न जाएं और काम पर वापस आएं और महामारी के माध्यम से हमें मदद करें.” Also Read - लालू यादव की बिगड़ी तबियत, AIIMS में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू

गुलेरिया ने कहा, “हमने इसके लिए उनके साथ कई बैठकें की हैं. न केवल एम्स प्रशासन बल्कि सरकार ने भी समझाया है कि उनका वेतन बढ़ाने की मांग पर विचार किया जाएगा. इसके बावजूद, महामारी के समय वेतन में वृद्धि की बात करना अनुचित है.” Also Read - टीके को लेकर लोगों में संदेह! एम्स निदेशक बोले- डरें मत, वैक्सीन आपको मारेगी नहीं

उन्होंने कहा कि एम्स के सभी कर्मचारियों ने कोरोना के दौर में बेहतरीन काम किया है. दुर्भाग्य से नर्सिंग यूनियन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2020 को नर्स व एएनएम का साल घोषित किया है. दुनिया कोरोना की महामारी के कारण युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रही है. नर्सों ने भी मरीजों की सेवा के लिए दिन रात काम किए हैं. वास्तविक नर्सिंग कर्मचारी अपने मरीजों व कोरोना से पीड़ित स्वास्थ्य कर्मचारियों को वार्ड में असहाय छोड़कर हड़ताल नहीं कर सकते.

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पांच हजार नर्सिंग स्टाफ अचानक हड़ताल पर जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों की मुश्किल बढ़ गई है.