नई दिल्लीः पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां राजधानी के लोग जहरीली हवा से परेशान हैं वहीं राज्य और केंद्र सरकार दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाने में लगे हुए हैं.

सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारों से पूछा क्या ऐसी स्थिति में जीवन जिया जा सकता है. कोर्ट ने राजधानी में प्रदूषण की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि को ई भी सरकार इससे नपटेने केलिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है और हाल यह है कि प्रदूषण लोगों के घरों में जा घुसा है. प्रदूषण पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक मजबूत देश में ऐसी स्थिति कैसे बन सकती है.

आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से दिल्ली की हवा में सास लेना मुश्किल हो रहा है. सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकारों को इस मामले में जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं.दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 5 नवंबर 2019 तक सभी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है.

1 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के पैनल पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीएल) ने प्रदूषण का स्तर अति गंभीर होने पर दिल्ली-एनसीआर में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की थी. इसके चलते 5 नवंबर तक सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई. बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र दोनों से ही इस मुद्दे पर राजनीति के बजाय कारगर कदम उठाने की हिदायत दी है.