नई दिल्लीः उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि हाल ही में संपन्न हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा सम्मेलन में भारत के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के प्रस्ताव के जवाब मे पड़ोसी देश ने खूनी विनाशकारी संघर्ष का विकल्प प्रस्तुत किया है. नायडू ने 20वें ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान’ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के दौरान भारत ने भावी मानवता के लिए शांतिपूर्ण और विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया.

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उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिये बिना कहा, “महासभा की बैठक में कुछ नेताओं की संकीर्ण स्वार्थ के लिए हिंसा, विनाश, आतंकवाद और युद्धोन्माद की विकृत मानसिकता भी देखने को मिली. मानवता के सामने भारत द्वारा प्रस्तावित शांति और विकास एवं अन्य देशों द्वारा हिंसक युद्धोन्माद की धमकी के बीच के विकल्प स्पष्ट दिखे.” उपराष्ट्रपति ने युद्धोन्मादी भाषण के विपरीत मानवता को विकास और शांति का संदेश देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की. उन्होंने कहा कि पीएम ने देश का मान बढ़ाय है.

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आतंकवाद को मानवता का दुश्मन बताते हुए नायडू ने आतंकवाद को प्रश्रय और समर्थन देने वाले देशों को यथाशीघ्र अलग-थलग करने की आवश्यकता पर बल दिया. देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा “शास्त्री जी शांति को समृद्धि के लिए आवश्यक शर्त मानते थे. भारत के प्राचीन मूल्यों और आदर्शों में उनकी निष्ठा ने उन्हें विषम परिस्थितियों को भी शांति और संयम से सफलतापूर्वक सुलझाने की क्षमता प्रदान की थी.”

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नायडू ने इस अवसर पर प्रख्यात पादप वैज्ञानिक और भारत सरकार के जैव तकनीक विभाग की पूर्व सचिव डॉ. मंजू शर्मा को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया. पुरस्कार प्रदान करते हुए उपराष्ट्रपति ने देश में वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि विश्व के सीमित संसाधनों में से ही ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने के लिए वैज्ञानिक शोध आवश्यक हैं. इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष अनिल शास्त्री भी मौजूद थे.