There Is No Bridge To Reach School Children Of This Village Cross River To Go To School Meghalya Norang River Village Kids Story
स्कूल जाने के लिए पुल नहीं, नदी पार कर स्कूल जाते हैं इस गांव के बच्चे, शिक्षा पाने के जज्बे को आप भी करेंगे सलाम
ये चुनौतियां गारो हिल्स के अलावा पूर्वोत्तर भारत के बहुत से दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में आम हैं, जहां बुनियादी ढांचे की कमी शिक्षा को प्रभावित करती है.
नदी पार करते बच्चे (तस्वीर- वीडियो के स्क्रीनशॉट से)
मेघालय के गारो हिल्स क्षेत्र में शिक्षा का सफर साहसिक और जोखिम भरी चुनौती है. दुनिया के ज्यादातर बच्चे स्कूल जाने के लिए बस या थोड़ी दूर पैदल चलते हैं, लेकिन नोरांग नदी (Norang River) के किनारे बसे गांवों के बच्चों की कहानी अलग है. वे हर रोज बहती हुई नदी को पार करके स्कूल पहुंचते हैं. इन बच्चों के संघर्ष का वीडियो कई बार वायरल हुआ, जिसमें इन बच्चों की दृढ़ता और संघर्ष दिखाई देता है, जो शिक्षा के प्रति उनकी लगन को दर्शाता है.
पुल की कमी
नोरांग नदी गारो हिल्स के कई गांवों को अलग करती है. इलाके में पुल की कमी के कारण बच्चों को नदी पार करनी पड़ती है. बच्चे एक-दूसरे का हाथ थामे, सावधानी से पानी में उतरते हैं. पानी का बहाव कई बार तेज भी होता है. स्तर मौसम के अनुसार बदलता रहता है. मानसून में यह और खतरनाक हो जाता है. फिर भी, वे धीरे-धीरे दूसरी ओर पहुंचते हैं. उनके कंधों पर स्कूल बैग लटके होते हैं और चेहरे पर शिक्षा पाने की दृढ़ इच्छा. यह रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है.
पुल निर्माण की मांग
गारो हिल्स, मेघालय का पश्चिमी हिस्सा है, जहां जनजातीय समुदाय बहुल हैं. यहां की भौगोलिक स्थिति पहाड़ी और नदी-नालों से भरी है. कई इलाकों में पुल निर्माण की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन विकास की गति धीमी है. वहां पर इसी तरह के अन्य उदाहरण भी हैं. जैसे नॉर्थ गारो हिल्स में इल्देक नदी पर पुल 7 साल से अधूरा पड़ा है, जहां बच्चे घुटने तक पानी में चलकर स्कूल जाते हैं. रेवाक हैंगिंग ब्रिज जैसे पुराने पुल क्षतिग्रस्त होने पर बच्चे छोटी नावों का सहारा लेते हैं.
बुनियादी ढांचे की कमी
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये चुनौतियां गारो हिल्स के अलावा पूर्वोत्तर भारत के बहुत से दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में आम हैं, जहां बुनियादी ढांचे की कमी शिक्षा को प्रभावित करती है. इन बच्चों के लिए नदी पार करना सिर्फ शारीरिक संघर्ष नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रतीक है. वे जानते हैं कि पढ़ाई उनके भविष्य को बदल सकती है. गरीबी, बेरोजगारी और सीमित अवसरों से मुक्ति दिला सकती है.
हालांकि मेघालय सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में कई योजनाएं चलाई हैं, जैसे फ्री कोचिंग और छात्रवृत्ति लेकिन बुनियादी पहुंच समस्या है. इन बच्चों की कहानी हमें याद दिलाती है बहुत बड़ी तादाद में ऐसे लोग हैं जिनके लिए शिक्षा अभी भी संघर्ष है.
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