नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शनिवार को स्पष्ट किया कि दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल सियाचिन में तैनात सैनिकों को दिए जाने वाले भोजन की पौष्टिकता में कोई कमी नहीं है और यह पर्याप्त से अधिक है. तृणमूल कांग्रेस सदस्य शांता छेत्री ने राज्यसभा में सरकार से सवाल किया था कि क्या सिचाचिन में तैनात सैनिकों द्वारा ली जा रही कैलोरी की मात्रा में 82 प्रतिशत तक की कमी है. इसके लिखित जवाब में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपाद नाइक ने कहा, ‘‘जी, नहीं. ऐसा कोई मामला नहीं आया है. एक दिन के लिए मानक राशन में ऊर्जा खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैलोरी होती है.’’ Also Read - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सेना का पाकिस्तान में खौफ: भाजपा

उन्होंने बताया कि राशन मानकों को जलवायु की विभिन्न परिस्थितियों में सैनिकों के ऊर्जा खर्च के अनुसार एक सैनिक की पोषण संबंधी आवश्यकता के आधार पर निर्धारित किया जाता है. उन्होंने कहा कि सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों (12000 फुट से अधिक) में इस प्रकार की परिस्थितियों में ऊर्जा खर्च की आपूर्ति के लिए राशन के विशेष मानक प्राधिकृत हैं. Also Read - भारतीय सेना को मिला अपना मोबाइल मैसेजिंग ऐप, बातचीत के लिए विशेष रूप से किया गया है विकसित

रक्षा कायिकी एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (डीआईपीएएस) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला देते हुए नाइक ने बताया 12000 फुट से अधिक ऊंचाई पर तैनात सैन्य दलों के लिए कुल ऊर्जा खर्च 4270 किलो कैलोरी है जबकि मौजूदा राशन 5350 किलो कैलोरी का है. उन्होंने कहा, ‘‘अतः यह देखा जा सकता है कि राशन से कैलोरी सेवन पर्याप्त से अधिक है.’’ Also Read - India-China Border Dispute: भारत-चीन के बीच अगले हफ्ते 8वें दौर की होगी बातचीत, ये लोग होंगे शामिल

रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि सभी स्थानों पर सैन्य दलों की पसंद के साथ-साथ पोषण संबंधी आवश्यकताओं की आपूर्ति करते हुए रक्षा खाद्य निर्देशनों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण राशन जारी सुनिश्चित करने के लिए एक सु-व्यवस्थित मजबूत तंत्र है. उन्होंने कहा, ‘‘सियाचिन में भी सदैव सैन्य दलों की पसंद और उनकी पोषण संबंधी आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त राशन सुनिश्चित किया जाता है.’’

ज्ञात हो कि सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा सैन्य क्षेत्र है. यह हिमालय के पूर्वी काराकोरम पर्वत श्रंखला में स्थित है. ठंड में यहां तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस नीचे तक पहुंच जाता है.

(इनपुट भाषा)