नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कई वामपंथी विचारकों, सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस की छापेमारी को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि न्यू इंडिया में एकमात्र एनजीओ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएससए) के लिए जगह है. बाढ़ प्रभावित केरल के दौरे पर पहुंचे गांधी ने ट्वीट कर कहा, भारत में अब सिर्फ एकमात्र एनजीओ के लिए जगह है और वह आरएसएस है. दूसरे सभी एनजीओ को बंद कर दो. सभी कार्यकर्ताओं को जेल भेज दो और शिकायत करने वालों को गोली मार दो. न्यू इंडिया में स्वागत है.

भीमा-कोरेगांव मामले में 5 गिरफ्तार

बता दें कि पुणे पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली, हैदराबाद सहित कई शहरों में छापा मारकर पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार किया है. वहीं, इस कार्रवाई का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक सुर में विरोध किया है. पिछले साल 31 दिसंबर को एल्गार परिषद के एक कार्यक्रम के बाद पुणे के पास कोरेगांव-भीमा गांव में दलितों और उच्च जाति के पेशवाओं के बीच हुई हिंसा की घटना की जांच के तहत ये छापे मारे गए हैं.

देशभर में छापेमारी और तलाशी अभियान

हैदराबाद में तेलुगू कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वेरनन गोन्जाल्विस और अरूण फरेरा, फरीदाबाद में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में सिविल लिबर्टीज के कार्यकर्ता गौतम नवलखा के आवासों में तकरीबन एक ही समय पर तलाशी ली गई. तलाशी के बाद राव, भारद्वाज और फरेरा को गिरफ्तार कर लिया गया. नवलखा के ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार तक रोक लगाई है.

भीमा कोरेगांव हिंसा में पुणे पुलिस की देशभर में छापेमारी, कवि वरवर राव सहित 5 गिरफ्तार

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इन लोगों को उनकी कथित नक्सली गतिविधियों को लेकर आईपीसी और गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून की संबद्ध धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है. गौतम नवलखा को भी गिरफ्तार कर लिया गया, हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को उन्हें कम से कम बुधवार शाम तक दिल्ली से बाहर नहीं ले जाने का आदेश दिया.

निशाने पर केंद्र सरकार

पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रसिद्ध लेखिका अरूंधती रॉय ने कहा कि ये गिरफ्तारियां उस सरकार के बारे में खतरनाक संकेत देती है जिसे अपना जनादेश खोने का डर है, और दहशत में आ रही है. बेतुके आरोपों को लेकर वकील, कवि, लेखक, दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया जा रहा है. हमें साफ-साफ बताइए कि भारत किधर जा रहा है.

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया, फासीवादी फन अब खुल कर सामने आ गए हैं. उन्होंने कहा कि यह आपातकाल की स्पष्ट घोषणा है. वे अधिकारों के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बोलने वाले किसी भी शख्स के पीछे पड़ जा रहे हैं. वे किसी भी असहमति के खिलाफ हैं. चर्चित इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने पुलिस की कार्रवाई को काफी डराने वाला करार दिया और सुप्रीम कोर्ट के दखल की मांग की ताकि आजाद आवाजों पर अत्याचार और उत्पीड़न को रोका जा सके. गुहा ने ट्वीट किया, आज अगर गांधीजी जिंदा होते तो वह खुद एक वकील के रूप में सुधा भारद्वाज का अदालत में बचाव करते.