मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मुस्लिम जज नहीं है। 2 फरवरी को जस्टिस एम वाई इकबाल और 22 जुलाई को जस्टिस फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला के रिटायर हो जाने के बाद ऐसी स्थिति बनी हुयी है।  पिछले करीब तीन दशकों में ऐसा दूसरी बार हुआ है कि देश की सर्वोच्च अदालत में कोई मुस्लिम जज नहीं है। आखिरी बार 2012 में सुप्रीम कोर्ट में किसी मुस्लिम जज की नियुक्ति हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एमवाई इकबाल और जस्टिस फकीर मोहम्मद 2012 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे। यह भी पढ़ें: सुप्रीमकोर्ट ने कहा देशद्रोह के मामलों में जनहित याचिका के जरिए नहीं होगी सुनवाई Also Read - Farm Laws पर बनाई गई कमेटी से अलग हुए भूपिंदर सिंह मान, सुप्रीम कोर्ट ने किया था गठन

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मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच जजों की नियुक्ति को लेकर चल रहे तनाव के कारण अगले मुस्लिम जज की नियुक्ति रुकी हुई है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। वहीं समय-समय पर भारत के मुख्य न्यायधीश ने कई मंचों पर इसको लेकर सरकार से आग्रह भी किया है। Also Read - Kisan Andolan: दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लोहड़ी पर नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं

मौजूदा समय में देश के दो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मुस्लिम हैं। असम के रहने वाले जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी बिहार हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। जस्टिस अंसारी अगले साल अक्टूबर में रिटायर होंगे। जम्मू-कश्मीर के रहने वाले जस्टिस सीजे मंसूर अहमद मीर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। जस्टिस मीर अप्रैल 2017 में रिटायर होंगे।

हाई कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र 62 साल और सुप्रीम कोर्ट के जजों की 65 है। सुप्रीम कोर्ट में अधिकतम 31 जजों की नियुक्ति हो सकती है जबकि वहां फिलहाल 28 जज ही हैं।

इस साल के अंत तक चार अन्य जज जस्टिस वी गोपाल गौड़ा, जस्टिस चोकालिंगम, जस्टिस शिव कीर्ति सिंह, जस्टिस अनिल आर दवे भी रिटायर हो जाएंगे।

रिटायर हो चुके हैं मुस्लिम जज

एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णनन ने इस बात पर चिंता भी जताई। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही अदालत को मुस्लिम जज मिल जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह उन्हें अधिकारों से वंचित करने का ही बस मामला नहीं है। यह सभी धर्म, जाति और क्षेत्र के उचित नेतृत्व पर सवाल उठाता है।

बहुत से देशों में यह विशेष प्रावधान है कि सभी जाति, धर्म और क्षेत्र को राष्ट्रीय कोर्ट में उचित प्रतिनिधित्व मिले।

चार मुस्लिम जज जस्टिस एम हिदायतुल्लाह, जस्टिस एम हमीदुल्लाह बेग, जस्टिस एएम अहमदी और जस्टिस अलतमस कबीर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जस्टिस एम फातिमा बीवी भी एक मुस्लिम थीं। उन्होंने 6 अक्टूबर 1989 से 29 अप्रैल 1992 तक सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवाएं दी थीं।

पहले भी हो चुका है ऐसा

इससे पहले अप्रैल 2003 से सितंबर 2005 तक सुप्रीम कोर्ट में कोई भी मुस्लिम जज नहीं था। 9 सितंबर 2005 को जस्टिस अलतमस कबीर की सर्वोच्च अदालत में नियुक्ति हुई थी।

बताते चलें कि अप्रैल 2003 से सितंबर 2005 तक तकरीबन ढाई साल ऐसा मौका रहा जब सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम जज नहीं रहे।

जस्टिस एसएसएम कादरी के 4 अप्रैल 2003 को रिटायर होने के बाद 9 सितंबर 2005 को जस्टिस अल्तमस कबीर की नियुक्ति हुई थी।