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- These Five Congress Leader Emerges As Key Point In Karnataka Election 2018
हारी हुई बाजी जीत गई कांग्रेस... इन ''पंचरत्नों'' ने निभाई अहम भूमिका
कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के बहुमत से दूर रहने के बावजूद सत्ता में हिस्सेदारी दिलाने की सियासी उठापटक ने पार्टी को कई ''रत्न'' भी दिए हैं.
नई दिल्ली/बेंगलुरु. कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के बहुमत से दूर रहने के बावजूद सत्ता में हिस्सेदारी दिलाने की सियासी उठापटक ने पार्टी को कई ”रत्न” भी दिए हैं. अजेय मानी जा रही बीजेपी और अमित शाह की रणनीति को इन ‘रत्नों’ ने धाराशाही करके यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी भी सियासी खेल के नए पैटर्न को अपना चुकी है. अब तय है कि साल 2019 का चुनावी खेल एक पक्षीय नहीं होगा. मोदी और शाह के नेतृत्व वाली बीजेपी का अजेय क्रम कर्नाटक में टूटना साल के अंत में मध्यप्रदेश, छत्तिसगढ़ और राजस्थान चुनाव में पार्टी के मनोबल को कम कर सकता है. कर्नाटक की इस सियासी लड़ाई में कांग्रेस के 5 नेताओं ने अहम किरदार निभाया. हर मोर्चे पर उन्होंने बीजेपी को पटखनी दी. आइए जानते हैं उन 5 नेताओं के बारे में…
सिद्धारमैया
सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस का चेहरा था. उन्होंने 5 साल के अपने काम के अलावा कई सियासी दांव के साथ जनता के बीच अपनी जगह बनाई. लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देनी हो या फिर मोदी-शाह की रणनीति का जवाब देना हो सिद्धारमैया हर जगह फ्रंट फुट पर खेलें. ये माना जाता है कि 78 सीट पर जीत में सिद्धारमैया की महत्वपूर्ण भूमिका रही. चुनाव के बाद बदले समीकरण में भी सिद्धारमैया ने कुमारस्वामी को समर्थन दे बड़ा सियासी दांव खेला. इतना ही नहीं कांग्रेस के सभी विधायकों को एकजुट करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
अभिषेक मनु सिंधवी
कर्नाटक चुनाव में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला. बीजेपी को जहां 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिलीं. इस बीच गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया. लेकिन इसी बीच अभिषेक मनु सिंधवी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और दावा किया कि कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास बहुमत है, लेकिन गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौता दिया. इसका असर ये हुआ कि गवर्नर ने जहां बहुमत साबित करने के लिए बीजेपी को 15 दिन का समय दिया था, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. कोर्ट ने शनिवार शाम 4 बजे फ्लोर टेस्ट कराने के लिए कहा. वहीं, दूसरी तरफ पूरे मामले की लाइव टेलीकॉस्ट की बात कही, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.
अशोक गहलोत
कांग्रेस के महासचिव प्रभारी अशोक गहलोत ने भी पूरे घटनाक्रम में बड़ी भूमिका निभाई. चुनाव प्रचार से लेकर नतीजे तक वह कर्नाटक पर नजर बनाए रखे. इतना ही नहीं कर्नाटक में हंग असेंबली आने पर वह तुरंत कर्नाटक रवाना हो गए. उनकी रणनीति का ही हिस्सा था कि कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दे दिया और आज कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनने जा रही है.
गुलाम नबी आजाद
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद भी नतीजे के तुरंत बाद कर्नाटक पहुंच गए. जेडीएस को समर्थन देने से लेकर देवगौड़ा से बातचीत तक गुलाम नबी आजाद की भूमिका काफी अहम रही. कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को एकजुट रखने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
डीके शिवकुमार
डीके शिवकुमार कर्नाटक में कांग्रेस के दो नंबर के नेता हैं. सिद्धारमैया के बाद वह पार्टी में एक मजबूते नेता और सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रहे. कहा जाता है कि दिल्ली के शीर्ष नेताओं से उनके अच्छे संबंध हैं. हंग असेंबली पर उन्होंने कांग्रेस के सभी विधायकों को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. गुजरात राज्यसभा चुनाव की तरह इस मौके पर भी शिवकुमार फ्रंट फुट पर दिखे और कांग्रेसी विधायकों को एकजुट करने में सफल रहे.
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