नई दिल्ली: आवास एवं शहरी विकास मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने संसद भवन और आसपास की अन्य ऐतिहासिक इमारतों के पुनर्विकास की योजना के मद्देनजर इन इमारतों के भविष्य को लेकर संशय दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और नॉर्थ ब्लॉक एवं साउथ ब्लॉक के स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा. पुरी ने शुक्रवार को संसद भवन पुनर्विकास योजना के तहत बनने वाली इमारतों के डिजाइन बनाने सहित अन्य कामों की जिम्मेदारी गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवर फ्रंट बनाने वाली कंपनी एचसीपी डिजाइन को सौंपने की जानकारी देते हुए बताया, ‘संसद भवन और नॉर्थ ब्लॉक एवं साउथ ब्लॉक अपने मूल स्वरूप में बरकरार रहेंगे. इनके इस्तेमाल में बदलाव हो सकता है.’

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के डिजाइन को लेकर जितने भी आइडिया अभी तक सामने आए हैं, उनमें से किसी में भी इन इमारतों को तोड़ने का विचार नहीं मिला है. पुरी ने कहा कि इन इमारतों के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इनके इस्तेमाल में बदलाव कर इन्हें संग्रहालय बनाने सहित कोई अन्य विकल्प भी हो सकते हैं. पुरी ने बताया कि 1921 में संसद भवन का निर्माण शुरु हुआ था, इसलिए इस इमारत के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं. जगह की कमी और अन्य जररूतों के मद्देनजर नई इमारत की जरूरत महसूस की जा रही है.

पुरी ने कहा कि संसद भवन, केन्द्रीय सचिवालय और राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट के बीच तीन किमी के इलाके (सेंट्रल विस्टा) के पुनर्विकास की योजना को आगे बढ़ाते हुए मंत्रालय ने इसके डिजाइन की अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की थी. इसमें देश दुनिया से लगभग 50 प्रस्ताव मिले. इनमें से एचसीपी सहित छह कंसल्टेंट कंपनियों के प्रस्तावित डिजाइन को चुना गया. उन्होंने बताया कि कंपनी की तकनीकी क्षमता, आर्थिक सक्षमता और गुणवत्ता दक्षता के मानक को पूरा करने वाली एचसीपी डिजाइन को परामर्शदाता के तौर पर चुना गया है.

पुरी ने कहा कि भवन एवं शहरी विकास योजना के विशेषज्ञों की मौजूदगी वाले केन्द्रीय संस्थान दिल्ली शहरी कला आयोग (डीयूएसी) के अध्यक्ष पी एस एन राव की अगुवाई में विशेषज्ञों का एक दल समग्र परियोजना की निगरानी करेगा. आवास एवं शहरी विकास सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बताया कि जनता सहित सभी पक्षकारों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अगले साल मई से पहले डिजाइन को अंतिम रूप देकर निर्माण कार्य शुरु करने की निविदा जारी कर दी जाएगी. उन्होंने बताया कि परियोजना का डिजाइन अगले 250 साल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जायेगा.

उन्होंने बताया कि तीन चरणों में पूरी होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण में नवंबर 2021 तक सेंट्रल विस्टा को बनाने, अगस्त 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले संसद भवन के पुनर्विकास और 2024 तक सभी मंत्रालयों को एक ही स्थान पर समेकित कर समग्र केन्द्रीय सचिवालय बनाने का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है. इस परियोजना की निगरानी कर रही केन्द्रीय भवन निर्माण एजेंसी, केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के महानिदेशक प्रभाकर सिंह ने बताया कि परियोजना डिजाइन से लेकर निर्माण तक, पूरी तरह से मेक इन इंडिया की अवधारणा पर आधारित है. उन्होंने बताया कि भवन डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी एचसीपी डिजाइन ने साबरमती रिवर फ्रंट के अलावा गांधीनगर में केन्द्रीय सचिवालय के सेंट्रल विस्टा और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट का भी डिजाइन तैयार किया था.