नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 के लिए आचार संहिता लग चुकी है. पार्टियों ने टिकट बंटवारे शुरू कर दिए हैं तो गठबंधन को भी अंतिम अमलीजामा पहनाया जा रहा है. इस बीच हम नजर डाले तों कुछ ऐसे राजनेता चुनावी राजनीति से दूर जा रहे हैं जो दशकों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं. दिल्ली की सरकार हो या राज्यों की सरकार, सारे समीकरण इनके इर्द-गिर्द ही बनते-बिगड़ते रहे हैं. हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार, बीजेपी नेता सुषमा स्वराज, उमा भारती और राम विलास पासवान की.Also Read - अभिनेत्री केतकी चिताले को 1 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया, शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का है आरोप

शरद पवार
शरद पवार महाराष्ट्र के उन नेताओं में शुमार हैं, जिन्होंने राज्य की राजनीति को शुरू से अपनी गतिविधियों से प्रभावित किया. साल 1967 में विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का जो सफर शुरू हुआ, वह साल 2014 तक जारी रहा. वह तीन बार महाराष्ट्र के सीएम बने. इतना ही नहीं वह केंद्र सरकार में रक्षा और कृषि मंत्री भी रह चुके हैं. Also Read - शरद पवार पर ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट को लेकर एक्ट्रेस के खिलाफ तीन और प्राथमिकी दर्ज, हो चुकी है गिरफ्तारी

पवार ने हाल ही में बयान दिया है कि उनके परिवार के सदस्य सुप्रिया सुले और अजीत पवार के बेटे पार्थ साल 2019 में मैदान में रहेंगे. ऐसे में वह चुनाव नहीं लड़ेंगे. बता दें कि पवार 14 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. ऐसे में उनका इस बार चुनाव मैदान में न उतरना काफी चर्चा में है. Also Read - अभिनेत्री Ketaki Chitale को 18 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया, Sharad Pawar के खिलाफ की थी आपत्तिजनक पोस्ट

पवार उन नेताओं में हैं जो कभी महाराष्ट्र में कांग्रेस के सर्वेसर्वा हुआ करते थे. उन्हें गांधी परिवार का करीबी भी माना जाता रहा है. लेकिन साल 1999 में जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी की कमान अपने हाथ में ली तो पवार की उनसे नहीं बनी और उन्होंने पार्टी छोड़कर नई पार्टी बना ली. बता दें शरद पवार अभी भी राज्यसभा सदस्य हैं.

सुषमा स्वराज
हरियाणा जैसे राज्य में इमरजेंसी के दौरान सक्रिय रहकर पूरे देश में अपनी पहचान बनाने वाली सुषमा स्वराज भी इस साल चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगी. इसके पीछ उन्होंने हवाला दिया है कि वह स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ेंगी. साल 1977 में वह पहली बार हरियाणा से विधायक बनीं थीं. इसके बाद वह तीन बार लगातार विधायक रहीं. वह चार बार सांसद भी रह चुकी हैं. वह दिल्ली की पहली महिला सीएम बनीं. इतना ही नहीं वह 4 बार लोकसभा सांसद और तीन बार राज्यसभा सांसद बनीं.

सुषमा स्वराज वर्तमान में केंद्र सरकार में विदेशमंत्री हैं. खास बात ये है कि सुषमा स्वराज एक ऐसी नेता हैं जो हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक, यूपी और मध्यप्रदेश से चुनाव राजनीति में सक्रिय रही हैं. सुषमा के चुनाव मैदान में नहीं उतरने से एक ऐसा रिक्त स्थान बनने जा रहा है जो फिलहाल किसी भी बीजेपी नेता के उपस्थिति से भरता नहीं दिख रहा है.

रामविलास पासवान
पटना यूनिवर्सिटी के छात्र नेता से करियर शुरू करने वाले राम विलास पासवान साल 1969 में ही पहली बार विधायक बन गए थे. हालांकि, उनके करियर को धार इमर्जेंसी के दौरान शुरू आंदोलनों से मिली और साल 1977 में वह पहली बार सांसद चुने गए. ये सफर साल 2014 तक जारी रहा. राम विलास पासवान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें राजनीति की नब्ज पता होती है. लालू यादव तो उन्हें राजनीति का मौसम वैज्ञानिक तक कहते हैं.

पासवान 8 बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं. इस बीच वह एक बार राज्यसभा सांसद भी बने. इस दौरान वह एनडीए से लेकर यूपीए की सरकारों में समय-समय पर कैबिनेट मंत्री रहे हैं. वह ऐसे नेता हैं जो गुजराल, देवेगौड़ा, वाजपेयी, मनमोहन और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाए गए.