Third Covid Wave: देश में कोरोना की दूसरी लहर (Covid Second Wave) का कहर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. कोरोना के मामलों में कमी आने के बाद ज्यादातर राज्यों ने लॉकडाउन (Lockdown) जैसी पाबंदियों में ढील भी दे दी है. कुछ जगहों से कोरोना नियमों (Coronavirus Guidelines) की धज्जियां उड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं. ऐसी खबरों और तस्वीरों पर विशेषज्ञ चेतावनी भी जारी कर चुके हैं, क्योंकि देश में संभावित तीसरी लहर का खतरा अब भी मंडरा रहा है. कई राज्यों ने कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारी भी शुरू कर दी है.Also Read - Kerala Covid-19 Update: केरल में कहर बरपा रहा कोरोना, देश में 50% से ज्यादा संक्रमित इसी राज्य से मिले | पहली बार हुआ ऐसा

इन सबके बीच न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दुनियाभर के करीब 40 एक्सपर्ट्स से इस मुद्दे पर रायशुमारी की है. एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि भारत में अक्टूबर तक कोरोना महामारी की तीसरी लहर आ सकती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सर्वे में विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि भारत तीसरी लहर का मुकाबला दूसरी लहर से बेहतर तरीके से करेगा. Also Read - कोरोना नियमों की अनदेखी और संभावित तीसरी लहर को लेकर केंद्र ने फिर चेताया, 'देश में अगले 100-125 दिन क्रिटिकल'

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सर्वे में दुनियाभर के 40 हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट, डॉक्टर, साइंटिस्ट, वायरोलॉजिस्ट और महामारी विशेषज्ञों को शामिल किया गया था. 3 से 17 जून के बीच कराए गए इस सर्वे में 85 फीसदी से ज्यादातर विशेषज्ञों ने माना कि तीसरी लहर अक्टूबर तक आएगी. वहीं, कुछ ने इसके अगस्त में आने की आशंका जताई तो कुछ ने सितंबर की शुरुआत में ही इसके आने की बात कही. Also Read - Covid-19 Update: तीसरी लहर की संभावना के बीच केरल और महाराष्ट्र में फिर बढ़ रहे संक्रमित, केंद्र ने जताई चिंता

इससे पहले एक रिसर्च में यह भी सामने आया कि ऐसी संभावना नहीं है कि भविष्य में कोरोना का मौजूदा स्वरूप दो साल और इससे अधिक उम्र के बच्चों को तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावित करेगा. देश में चल रहे एक अध्ययन के अंतरिम नतीजों में यह दावा किया गया है. ‘सीरो-पॉजिटिविटी’ रक्त में एक विशेष प्रकार की एंटीबॉडी की मौजूदगी है. देश में कोविड-19 की तीसरी लहर में बच्चों और किशोरों के सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच अध्ययन के नतीजे आए हैं.

अध्ययन के अंतरिम नतीजे मेडआरक्सीव में जारी किये गये हैं जो एक प्रकाशन पूर्व सर्वर है. ये नतीजे 4,509 भागीदारों के मध्यावधि विश्लेषण पर आधारित हैं. इनमें दो से 17 साल के आयु समूह के 700 बच्चों को, जबकि 18 या इससे अधिक आयु समूह के 3,809 व्यक्तियों को शामिल किया गया. ये लोग पांच राज्यों से लिए गए थे. आंकड़े जुटाने की अवधि 15 मार्च से 15 जून के बीच की थी. इन्हें 5 स्थानों से लिया गया, जिनमें दिल्ली शहरी पुनर्वास कॉलोनी, दिल्ली ग्रामीण (दिल्ली-एनसीआर के तहत फरीदाबाद जिले के गांव), भुवनेश्वर ग्रामीण क्षेत्र, गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र और अगरतला ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं.

नतीजों में कहा गया है, ‘सीरो मौजूदगी 18 साल से कम उम्र के आयु समूह में 55.7 है और 18 साल से अधिक उम्र के आयु समूह में 63.5 प्रतिशत है. वयस्कों और बच्चों के बीच मौजूदगी में सांख्यिकी रूप से कोई मायने रखने वाला कोई अंतर नहीं है. अध्ययन के नतीजे के मुताबिक शहरी स्थानों (दिल्ली में) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में सीरो पॉजिटिविटी दर कम पाई गई. ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों में वयस्कों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सीरो पॉजिटिविटी पाई गई.

(इनपुट: भाषा)