Coronavirus Third Wave News: कोरोना की दूसरी लहर का कहर धीरे-धीरे कम हो रहा है. हालांकि कुछ राज्यों से इसके लगातार सामने आ रहे मामलों ने चिंता बढ़ा रखी है. इन सबके बीच संभावित तीसरी लहर (Third Wave) के स्वरूप को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. शीर्ष वायरस विज्ञानी गगनदीप कांग (Gagandeep Kang) ने कहा कि कोरोना के किसी नये स्वरूप के नहीं आने पर महामारी की तीसरी लहर दूसरी लहर जैसी भयावह नहीं होगी. उन्होंने वायरस के नये स्वरूपों से निपट सकने वाले बेहतर टीके विकसित करने की जरूरत और नियामक तंत्र मजबूत करने पर जोर दिया.Also Read - MNS chief राज ठाकरे, मां और बहन समेत कोरोना पॉजिटिव निकले, लीलावती अस्‍पताल में भर्ती

कांग ने कहा, ‘जब तक नया स्वरूप नहीं आएगा, तीसरी लहर उतनी भयावह नहीं होगी जितना कि हमने दूसरी लहर के दौरान सामना किया था.’ देश में मार्च और मई के बीच महामारी की दूसरी लहर के दौरान हजारों लोग मारे गये थे और लाखों लोग संक्रमित हुए थे तथा स्वास्थ्य ढांचा चरमरा गया था. कांग ने कहा, ‘क्या हम कोविड से निपट चुके हैं? नहीं, हम नहीं निपट सके हैं. क्या हम कोविड से निजात पाने जा रहे है? निकट भविष्य में नहीं.’ Also Read - Corona Death Case: रहें अलर्ट! कोरोना से मौत की संख्या में फिर आया बड़ा उछाल, 24 घंटे में 666 लोगों की गई जान

क्रिश्चन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर में प्राध्यापक कांग ने सीआईआई लाइफसाइंसेज कॉनक्लेव को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रही थीं. गौरतलब है कि देश में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि का अनुमान लगाने की जिम्मेदारी विशेषज्ञों की जिस तीन सदस्यीय टीम को सौंपी गई है, उसमें शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर के वैज्ञानिक मनींद्र अग्रवाल ने कहा था कि सितंबर तक कारोना का एक कहीं अधिक प्रसार करने वाला वायरस सामने आने पर देश में अक्टूबर-नवंबर के बीच तीसरी लहर चरम पर पहुंच सकती है। Also Read - Chhath Puja 2021: दिल्ली में छठ पूजा पर से हट सकती है रोक! कोरोना पर चर्चा के लिए 27 अक्टूबर को बैठक करेगी DDMA

कांग ने कहा कि भारतीय टीका उद्योग महामारी से निपटने में पूरी तरह अभूतपूर्व रूप से काम किया है, लेकिन इसे अभी भी काफी सफर तय करना है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन मैं (नियामक प्रणाली के बारे में) यहीं चीज नहीं कह सकती क्योंकि लोग हमारी नियामक प्रणाली के बारे में जानते हैं. लेकिन यह कुछ ऐसी चीज है जिसका हमें भविष्य के लिए एक सबक के तौर पर उपयोग करना चाहिए, क्योंकि हमें सचमुच में जानकारी रखने वाले, मजबूत नियामकों की जरूरत है, जो जरूरत के अनुसार उद्योगों के साथ काम कर सके.’

(इनपुट: भाषा)